“‘वनवासी’ शब्द पर भड़का आदिवासी समाज, अमित शाह का पुतला फूंककर जताया विरोध”

बालोद। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज को “वनवासी” कहकर संबोधित किए जाने के विरोध में शुक्रवार को जिला आदिवासी कांग्रेस के नेतृत्व में बालोद के जय स्तंभ चौक पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
कार्यक्रम का नेतृत्व जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष लता कोर्राम ने किया।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज भारत का मूलनिवासी समाज है और उसे संविधान तथा इतिहास में आदिवासी के रूप में ही पहचान मिली है। ऐसे में आदिवासी समाज को “वनवासी” कहकर संबोधित करना उनकी पहचान और अस्मिता का अपमान है।
लता कोर्राम ने कहा कि आदिवासी समाज विश्व के सबसे प्राचीन समुदायों में से एक है, जो आदिकाल से जल, जंगल और जमीन के साथ जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि “वनवासी” शब्द उन लोगों के लिए प्रयुक्त होता है, जो किसी कारणवश कुछ समय के लिए वन क्षेत्र में निवास करते हैं। उदाहरण स्वरूप भगवान श्रीराम ने 14 वर्षों का वनवास किया था,

इसलिए उन्हें वनवासी कहा गया। जबकि आदिवासी समाज सदियों से जंगलों और प्राकृतिक परिवेश में निवास करता आया है, इसलिए उसकी पहचान आदिवासी के रूप में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा लगातार आदिवासी समाज की पहचान को बदलने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे समाज किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि देश के गृह मंत्री को आदिवासी और वनवासी के बीच का अंतर समझना चाहिए तथा आदिवासी समाज की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज ने हमेशा देश, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह और शहीद गैंद सिंह जैसे महान आदिवासी वीरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना अच्छी तरह जानता है।
कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से आदिवासी समाज के प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करने तथा उनकी पहचान और अधिकारों की रक्षा करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी, नरेंद्र सिन्हा, अमृता नेताम, भूपेश सहारे, मुरलीधर भुआर्य, राजकुमार प्रभाकर, राकेश उइके, ललित कंवरे, कमलेश श्रीवास्तव, धर्मेंद्र रामटेके, अंचल साहू, धीरज उपाध्याय, वैभव साहू, सुमित शर्मा, साजन पटेल, संतोष चौधरी, चंद्रकांत राणा, पाल सिंह भुआर्य, रोहित सागर, शैलेन्द्र ठाकुर, देवेंद्र साहू, सुनील मंडावी, लोकेश साहू, तामेश कुमार सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज एवं कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।




