जिला चिकित्सालय का खंडन:- शोसल मीडिया खबरों को बताया गलत तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, अस्पताल ने नियमों के तहत की कार्रवाई

बालोद :- जिला चिकित्सालय प्रबंधन ने हाल ही में सोशल मीडिया एवं कुछ माध्यमों में प्रसारित उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें अस्पताल प्रशासन पर मरीजों के साथ अनुचित व्यवहार एवं उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि मामले को तथ्यों से हटकर प्रस्तुत किया जा रहा है तथा अनावश्यक रूप से विवाद का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रबंधन के अनुसार संबंधित तीन व्यक्ति नशे की हालत में अस्पताल पहुंचे थे। प्राथमिक जांच एवं उपचार की प्रक्रिया के दौरान उन्हें आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने तथा निर्धारित शुल्क के अनुसार पर्ची कटवाने के लिए कहा गया था।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उपचार संबंधी सभी प्रक्रियाएं शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं जेडीएस (जनरल ड्यूटी सिस्टम) के शुल्क मानकों के अनुरूप ही संचालित की जाती हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि संबंधित व्यक्तियों से आयुष्मान कार्ड अथवा अन्य पात्रता संबंधी दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी गई थी, ताकि उन्हें उपलब्ध सुविधाओं का लाभ दिया जा सके। किंतु उनके द्वारा इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीयन कराने और शुल्क जमा करने का आग्रह किया गया।
प्रबंधन का कहना है कि मामूली राशि की पर्ची कटवाने को लेकर संबंधित व्यक्तियों ने आपत्ति जताई और बाद में अन्य लोगों को भी अस्पताल बुला लिया। इसके पश्चात अस्पताल परिसर में जिला प्रशासन एवं अस्पताल कर्मचारियों के साथ बहस और विवाद की स्थिति निर्मित हुई।
अस्पताल प्रशासन ने संयमित तरीके से स्थिति को संभाला तथा नियमों के अनुसार कार्यवाही जारी रखी।
जिला चिकित्सालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मरीज के साथ भेदभाव नहीं किया जाता और सभी को शासन द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी मामले में भ्रामक एवं अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया दें।
जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन आरके श्रीमाली कहा कि अस्पताल में उपचार, पंजीयन एवं शुल्क संबंधी व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है तथा कर्मचारियों द्वारा निर्धारित नियमों के तहत ही कार्य किया जाता है। मामले को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियां वास्तविक तथ्यों से परे हैं और अस्पताल की छवि धूमिल करने का प्रयास प्रतीत होती हैं।




