Tuesday, June 23, 2026

करोड़ों के डिवाइडर निर्माण पर उठे सवाल:- पहले लगाए पोल, अब कंक्रीट चढ़ाकर हो रही मरम्मत नेशनल हाईवे-930 पर डिवाइडर निर्माण में गड़बड़ी की आशंका, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

करोड़ों के डिवाइडर निर्माण पर उठे सवाल:- पहले लगाए पोल, अब कंक्रीट चढ़ाकर हो रही मरम्मत

नेशनल हाईवे-930 पर डिवाइडर निर्माण में गड़बड़ी की आशंका, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

बालोद :– नेशनल हाईवे-930 पर सुमित बाजार से कॉलेज मार्ग तक चल रहे डिवाइडर निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय नागरिकों, राहगीरों और जनप्रतिनिधियों के बीच गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के पालन को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

निर्माण स्थल पर अपनाई जा रही प्रक्रिया को देखकर लोग हैरानी जता रहे हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार डिवाइडर निर्माण के दौरान पहले सीमेंट-कंक्रीट ब्लॉकों में बोल्ट की सहायता से लोहे के पोल स्थापित किए गए थे।

लेकिन अब उन्हीं पोलों के आधार को मजबूत करने के नाम पर अतिरिक्त कंक्रीट ब्लॉक तैयार कर पुराने ढांचे के ऊपर लगाए जा रहे हैं।

निर्माण की यह प्रक्रिया लोगों की समझ से परे है और इससे प्रारंभिक निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि डिवाइडर पोलों का फाउंडेशन और आधार शुरू से ही निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया गया होता, तो कुछ ही समय बाद अतिरिक्त कंक्रीट डालकर उसे मजबूत करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

लोगों का आरोप है कि वर्तमान में की जा रही यह कवायद कहीं न कहीं निर्माण कार्य में हुई कमियों को छिपाने या सुधारने का प्रयास प्रतीत होती है।
तकनीकी अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के तकनीकी अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।

नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करना विभागीय उप अभियंता, एसडीओ तथा अन्य तकनीकी अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।

नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
लोगों का सवाल है कि यदि प्रारंभिक निर्माण पूरी तरह सही था तो अब अतिरिक्त कंक्रीट ब्लॉक लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। वहीं यदि निर्माण में खामियां थीं, तो संबंधित कार्य को स्वीकृति कैसे प्रदान की गई। ऐसे प्रश्न विभाग की निगरानी व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
राहगीरों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
नेशनल हाईवे-930 जिले का एक महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग है, जहां प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। कई स्थानों पर वाहन 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं। ऐसे में यदि डिवाइडर पोल या उनका आधार कमजोर साबित होता है, तो सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिवाइडर केवल सड़क सौंदर्यीकरण का हिस्सा नहीं होते, बल्कि यातायात सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण संरचनाएं हैं। इनका मुख्य उद्देश्य वाहनों को विपरीत दिशा में जाने से रोकना और दुर्घटनाओं की संभावना कम करना होता है। ऐसे में इनके निर्माण में किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही भविष्य में गंभीर हादसों का कारण बन सकती है।
स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल ऊपर से मरम्मत कर देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।

डिवाइडर पोलों की नींव, कंक्रीट की गुणवत्ता, उपयोग की गई स्टील सामग्री तथा निर्माण प्रक्रिया की विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा जांच कराई जानी चाहिए।
नागरिकों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, घटिया निर्माण या तकनीकी मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे न केवल सार्वजनिक धन की सुरक्षा होगी बल्कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही पर भी रोक लगेगी।
प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
मामले को लेकर जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से भी हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में पारदर्शिता, गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

नागरिकों ने मांग की है कि किसी संभावित दुर्घटना से पहले पूरे निर्माण कार्य का निरीक्षण कराया जाए और जहां भी तकनीकी खामियां पाई जाएं, उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार सुधारा जाए।

फिलहाल डिवाइडर निर्माण में अपनाई जा रही प्रक्रिया को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं और अब लोगों की निगाहें राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग तथा जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। जांच होती है या नहीं और यदि होती है तो उसके क्या निष्कर्ष सामने आते हैं, यह आने वाले    दिनों में स्प्ष्ट होगा।

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