Saturday, June 20, 2026

जिम्मेदार पक्ष का वर्जन लिए बिना प्रकाशित खबर पर उठे सवाल, जिला अस्पताल प्रबंधन ने बताया भ्रामक सोनोग्राफी मशीन को लेकर वायरल खबर पर विवाद, सिविल सर्जन का पक्ष लिए बिना आरोपों के साथ प्रकाशित करने पर सवाल

 

जिम्मेदार पक्ष का वर्जन लिए बिना प्रकाशित खबर पर उठे सवाल, जिला अस्पताल प्रबंधन ने बताया भ्रामक
सोनोग्राफी मशीन को लेकर वायरल खबर पर विवाद, सिविल सर्जन का पक्ष लिए बिना आरोपों के साथ प्रकाशित करने पर सवाल

बालोद :-   जिला अस्पताल बालोद की सोनोग्राफी सेवा को लेकर कुछ समाचार पोर्टलों और सोशल मीडिया माध्यमों में प्रकाशित खबरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि संबंधित खबर में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन प्रकाशन से पूर्व जिला अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों, विशेषकर सिविल सर्जन एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारियों का पक्ष नहीं लिया गया।
जानकारों का कहना है कि पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के अनुसार किसी भी संस्था या अधिकारी पर आरोप लगाए जाने से पहले उनका पक्ष लेना आवश्यक होता है, ताकि पाठकों के सामने तथ्यात्मक और संतुलित जानकारी प्रस्तुत की जा सके। लेकिन संबंधित खबर में केवल आरोपों और शिकायतों को प्रमुखता दी गई, जबकि अस्पताल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष प्रकाशित नहीं किया गया।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सोनोग्राफी जैसी सेवाओं के संचालन में कई प्रशासनिक, तकनीकी और नियामकीय पहलू जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति, उपलब्ध संसाधन, विशेषज्ञों की नियुक्ति तथा शासन स्तर पर चल रही प्रक्रिया की जानकारी लिए बिना एकतरफा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।
अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि यदि किसी सेवा में अस्थायी व्यवधान या विशेषज्ञों की कमी जैसी स्थिति है, तो उसके पीछे के कारणों को भी सामने लाया जाना चाहिए। केवल आरोप आधारित खबर प्रकाशित करने से आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है तथा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की छवि प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि यदि किसी विषय पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं तो संबंधित अधिकारियों का वर्जन भी प्रकाशित किया जाना चाहिए, जिससे पाठकों को दोनों पक्षों की जानकारी मिल सके और वे स्वयं सही निष्कर्ष निकाल सकें।
मीडिया जगत के जानकारों के अनुसार निष्पक्ष पत्रकारिता का आधार तथ्यों का संतुलित प्रस्तुतिकरण है। किसी भी समाचार में शिकायतकर्ता और संबंधित विभाग या अधिकारी दोनों का पक्ष शामिल होने से खबर अधिक विश्वसनीय और तथ्यपरक बनती है।
अब चर्चा का विषय यह है कि जिला अस्पताल की सोनोग्राफी सेवा को लेकर प्रकाशित खबर में यदि सिविल सर्जन या अस्पताल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष शामिल किया जाता तो पाठकों के सामने पूरी तस्वीर आ सकती थी। ऐसे में बिना जिम्मेदार अधिकारियों का वर्जन लिए प्रकाशित समाचार की तथ्यात्मकता और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।

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