Tuesday, September 1, 2026

बाल संरक्षण कानूनों की दी जानकारी, बच्चों को अधिकारों के प्रति किया जागरूक

 

बाल संरक्षण कानूनों की दी जानकारी, बच्चों को अधिकारों के प्रति किया जागरूक

बालोद। राज्य बाल संरक्षण समिति के निर्देशन, जिला कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के आदेशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अमित सिन्हा एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री गजानंद साहू के मार्गदर्शन में बुनियादी माध्यमिक शाला, बालोद में जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा बच्चों के अधिकार एवं बाल संरक्षण कानूनों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों तथा विभिन्न बाल संरक्षण कानूनों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने पॉक्सो अधिनियम, 2012, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, गुड टच–बैड टच, ऑनलाइन सुरक्षा तथा बाल अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरल एवं प्रभावी ढंग से जानकारी दी।
इस दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि यदि उनके साथ किसी भी प्रकार का शोषण, हिंसा, उत्पीड़न या दुर्व्यवहार होता है, तो वे बिना किसी भय के चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, अजनबियों से सावधानी बरतने तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए भी प्रेरित किया गया।
जिला बाल संरक्षण इकाई के सामाजिक कार्यकर्ता श्री अनिल कुमार सिन्हा एवं आउटरीच वर्कर श्री अखिलेश ने बच्चों को कानूनों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त वातावरण में जीवन जीने का अधिकार है। वहीं चाइल्ड हेल्पलाइन की सुपरवाइजर श्रीमती नेहा चंद्राकर एवं मास्टर ट्रेनर श्रीमती भगवंतिन सिन्हा ने बच्चों को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता लेने की प्रक्रिया विस्तार से समझाई।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधान पाठक, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने बाल संरक्षण एवं सुरक्षा संबंधी जानकारी को अपने दैनिक जीवन में अपनाने तथा अन्य बच्चों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा संबंधी कानूनों एवं उपलब्ध सहायता सेवाओं के प्रति जागरूक करना तथा विद्यालयों में सुरक्षित, संवेदनशील एवं बाल-अनुकूल वातावरण का निर्माण करना रहा। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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