Saturday, August 29, 2026

पुनर्वासित युवाओं के बीच जमीन पर बैठे राजेश सिंह राणा, उनके हाथों बना भोजन किया 20 पुनर्वासित युवाओं को 5G स्मार्टफोन देकर डिजिटल दुनिया से जोड़ा, कोसा से सिल्क निकालने, हथकरघा पर साड़ी बुनने और आधुनिक सिलाई का प्रशिक्षण शुरू

पुनर्वासित युवाओं के बीच जमीन पर बैठे राजेश सिंह राणा, उनके हाथों बना भोजन किया

20 पुनर्वासित युवाओं को 5G स्मार्टफोन देकर डिजिटल दुनिया से जोड़ा, कोसा से सिल्क निकालने, हथकरघा पर साड़ी बुनने और आधुनिक सिलाई का प्रशिक्षण शुरू

 

सुकमा। पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने की पहल को सुकमा में जमीनी रूप दिया गया। छत्तीसगढ़ शासन के खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के सचिव एवं जिले के प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा ने मंगलवार को अपने एक दिवसीय सुकमा प्रवास के दौरान पुनर्वासित युवाओं के बीच पहुंचकर कौशल विकास, स्वरोजगार और डिजिटल सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न पहलों की शुरुआत की।

जिला कार्यालय में अधिकारियों के साथ विकास कार्यों और पुनर्वास गतिविधियों की समीक्षा के बाद राजेश सिंह राणा ने जिले में संचालित योजनाओं का जायजा लिया। इस दौरान कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर भी मौजूद रहे।

हुनर को बनाया आजीविका का जरिया

प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा ने लाइवलीहुड कॉलेज पहुंचकर पुनर्वासित युवाओं के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ग्रामोद्योग विभाग की पहल से शुरू किए गए दो माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में 20 पुनर्वासित युवाओं को कोसा से सिल्क निकालने, उन्नत हथकरघा पर साड़ी बुनने और आधुनिक सिलाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को केवल तकनीकी जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे हुनर से जोड़ना है, जिसे वे आगे चलकर स्वरोजगार का माध्यम बना सकें। पारंपरिक कोसा और हथकरघा कला को आधुनिक तकनीक एवं प्रशिक्षण से जोड़कर युवाओं के लिए आय के नए अवसर तैयार करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

5G स्मार्टफोन देकर डिजिटल दुनिया से जोड़ा

लाइवलीहुड कॉलेज के बाद राजेश सिंह राणा पुनर्वास केंद्र पहुंचे। उन्होंने पुनर्वासित युवाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, जरूरतों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने युवाओं को अपने हुनर को रोजगार का माध्यम बनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।

पुनर्वास नीति के तहत 20 पुनर्वासित युवाओं को 5G स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए। इसके माध्यम से युवाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने के साथ आधुनिक संचार, ऑनलाइन जानकारी और डिजिटल माध्यमों के उपयोग के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

युवाओं के साथ जमीन पर बैठकर किया भोजन

प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा का पुनर्वास केंद्र में सहज और आत्मीय व्यवहार भी चर्चा का विषय रहा। पुनर्वासित युवाओं ने अपने हाथों से भोजन तैयार किया था। राणा ने बिना किसी औपचारिकता के उन्हीं युवाओं के साथ जमीन पर बैठकर उनके हाथों से तैयार भोजन ग्रहण किया।

प्रशासनिक अधिकारी का युवाओं के बीच इस तरह सहज होकर बैठना और उनके साथ भोजन करना संवाद, विश्वास और अपनत्व की भावना को मजबूत करने वाला रहा। इससे पुनर्वासित युवाओं में भी आत्मविश्वास और प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ाने का संदेश गया।

पुनर्वास से आत्मनिर्भरता तक की पहल

राजेश सिंह राणा का सुकमा प्रवास केवल योजनाओं की समीक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने पुनर्वासित युवाओं से सीधे संवाद किया, उनके साथ भोजन किया, उन्हें डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए और रोजगार से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण की शुरुआत कराई।

इस पहल का व्यापक उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ उन्हें कौशल, तकनीक और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने भविष्य को नई दिशा देते हुए सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।

तुंगल डैम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर

सुकमा प्रवास के अंतिम चरण में राजेश सिंह राणा तुंगल डैम पहुंचे। उन्होंने डैम की प्राकृतिक सुंदरता और क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं का अवलोकन किया। उन्होंने कलेक्टर अमित कुमार को तुंगल डैम को सुव्यवस्थित एवं प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

इस दौरान तुंगल डैम घूमने पहुंचे स्कूली बच्चों से भी उन्होंने आत्मीय संवाद किया। बच्चों से उनकी पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी लेते हुए उन्होंने मेहनत करने तथा अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

समग्र रूप से सुकमा प्रवास के दौरान राजेश सिंह राणा ने विकास कार्यों की समीक्षा के साथ पुनर्वासित युवाओं के कौशल उन्नयन, स्वरोजगार, डिजिटल सशक्तिकरण और सामाजिक पुनर्स्थापन पर विशेष जोर दिया। वहीं, युवाओं के साथ जमीन पर बैठकर उनके हाथों बना भोजन ग्रहण कर उन्होंने प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय संवाद की एक आत्मीय मिसाल भी पेश की।

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