Thursday, April 16, 2026

कलेक्टर के आदेश की उड़ाई धज्जियां, 10 घंटे के बाद फिर से खुल दूध गंगा का काउंटर, प्रशासन दे रही सफाई

 

कलेक्टर के आदेश की उड़ाई धज्जियां, 10 घंटे के बाद फिर से खुल दूध गंगा का काउंटर, प्रशासन दे रही सफाई

बालोद। :- बालोद कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने विगत 9 अप्रैल को सुबह 8 बजे गंगा मैया दुग्ध उत्पादक एवं प्रसंस्करण सहकारी समिति का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों में कमियां पाई गईं। मिठाई निर्माण इकाई और तैयार सामग्रियों में शुद्धता व साफ-सफाई की कमी मिली। फ्लोर बेस के गड्ढों में जमे पानी से दुर्गंध एवं निर्माण कार्य में लगे हलवाइयों द्वारा कैप (टोपी) और ग्लब्स जैसे आवश्यक सुरक्षा संसाधनों का उपयोग नहीं किया जा रहा था।
उपरोक्त कमियों को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बालोद के द्वारा जारी आदेशानुसार खाद्य मानकों की अनदेखी करने पर तत्काल प्रभाव से निर्माण इकाई एवं विक्रय इकाई को सील कर दिया गया।

लेकिन सूरज ढलने के साथ ही एक खबर निकलकर सामने आई की दूध गंगा के काउंटर शटर को फिर से खोलकर सामानों की बिक्री की जा रही है। जब मौके पर जाकर देखा गया तो वाकई शटर के भीतर दूध गंगा में काम करने वाले दो कर्मचारी मौजूद थे और ग्राहक लगातार सामान खरीदने के लिए पहुंच रहे थे। कुछ ग्राहकों को वापस लौटा दिया जा रहा था तो वहीं कुछ ग्राहकों को काउंटर के भीतर मौजूद सामानों को बेचा जा रहा था। सीधे तौर पर दूध गंगा समिति की ओर से कलेक्टर के आदेश की अहेलना और धज्जियां उड़ाई जा रही थी।

केवल दूध खरीदी बिक्री जारी

प्रशासन की माने तो दूध गंगा में किसानों से किसानों से दूध का क्रय एवं विक्रय निरंतर जारी रहेगा ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न हो। चिलिंग और स्टोरेज यूनिट को खुला रखा गया है ताकि आम उपभोक्ताओं को दूध की आपूर्ति में कोई असुविधा न हो। लेकिन कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन करते हुए दूध के अलावा भी अन्य सामानों की बिक्री 10 घंटे के भीतर चालू कर दी गई थी।

15 दिनों के भीतर सुधारने का समय

दूध गंगा संस्था को सभी कमियों को सुधारने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। इन कमियों की पूर्ति और प्रशासन द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद, यदि सभी मानक सही पाए जाते हैं, तभी इकाई को पुनः संचालित करने की अनुमति प्रदान की जाएगी। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर दूध गंगा को सील कर दिया गया है और केवल दूध की खरीदी बिक्री की छूट दी गई है तो आखिर काउंटर को खोलने की क्या जरूरत पड़ी। दूध की खरीदी बिक्री के लिए एक अलग से स्थान निर्धारित है जहां किस दूध बेचते भी हैं और ग्राहक दूध खरीदने भी हैं। अब देखने वाली बात होगी कि कलेक्टर के आदेश के धज्जियां उड़ाने वाले जिम्मेदारों पर क्या कुछ कार्यवाही होती है।

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