विकास की नई राह गढ़तीं कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा: सुशासन, नवाचार और जनभागीदारी से बालोद बना मॉडल जिला
एक वर्ष में बदली जिले की तस्वीर,

बालोद :- छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सेवा में अपनी कार्यकुशलता, दूरदर्शी सोच और जनहितकारी कार्यशैली के लिए पहचान बनाने वाली आईएएस अधिकारी दिव्या उमेश मिश्रा ने बालोद जिले में विकास की नई इबारत लिखी है।

वर्ष 2012 बैच की इस ऊर्जावान अधिकारी ने अप्रैल 2025 में बालोद कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी का कार्यभार संभालने के बाद जिले के समग्र विकास को केंद्र में रखकर अनेक अभिनव पहलें शुरू कीं, जिनका प्रभाव आज जिले के हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
जनभागीदारी को बनाया विकास का आधार

दिव्या उमेश मिश्रा ने प्रशासन को केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित न रखकर उसे जनता के द्वार तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने ग्राम पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों, महिला समूहों, युवाओं और सामाजिक संस्थाओं को विकास प्रक्रिया से जोड़कर जनभागीदारी को मजबूत किया। परिणामस्वरूप कई योजनाएं जन-आंदोलन का रूप ले सकीं और लोगों में शासन के प्रति विश्वास बढ़ा।
जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन में उल्लेखनीय पहल

जिले में जल संकट की संभावित चुनौतियों को देखते हुए जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, भू-जल संरक्षण और वृक्षारोपण अभियानों को व्यापक स्तर पर संचालित किया गया। पर्यावरण संरक्षण के लिए स्कूलों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित कर हरित बालोद की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए।
महिला सशक्तिकरण और आजीविका को मिला नया आयाम

महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई नवाचार किए गए। स्वरोजगार, लघु उद्योग, कृषि आधारित गतिविधियों और स्थानीय उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुआ। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

कलेक्टर मिश्रा के नेतृत्व में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए। स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने के प्रयास, स्वास्थ्य केंद्रों की सुदृढ़ता तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों ने जिले के सामाजिक विकास को नई गति प्रदान की।
कृषि और ग्रामीण विकास पर विशेष फोकस

कृषि प्रधान जिले बालोद में किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए गए। ग्रामीण सड़कों, पेयजल, विद्युत और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से गांवों में विकास की नई संभावनाएं बनीं।
पारदर्शी प्रशासन और त्वरित समस्या समाधान

दिव्या उमेश मिश्रा ने प्रशासनिक पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए जनचौपाल, जनदर्शन और नियमित निरीक्षण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया। जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के कारण आम नागरिकों में प्रशासन के प्रति विश्वास और संतोष बढ़ा है।
राष्ट्रीय स्तर पर बनी पहचान

अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक के कार्यकाल में बालोद जिले ने जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, जनभागीदारी, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। इन प्रयासों के कारण बालोद की पहचान एक उभरते हुए मॉडल जिले के रूप में बनने लगी है।
प्रेरणादायी नेतृत्व की मिसाल

दिव्या उमेश मिश्रा का प्रशासनिक नेतृत्व यह दर्शाता है कि यदि योजनाओं का क्रियान्वयन संवेदनशीलता, ईमानदारी और दूरदर्शिता के साथ किया जाए तो कम समय में भी बड़े परिवर्तन संभव हैं।
उनका कार्यकाल बालोद जिले के विकास इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
“जनहित, पारदर्शिता और नवाचार के संगम से बालोद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा आज सुशासन और विकासोन्मुख प्रशासन की सशक्त पहचान बन चुकी हैं।”
क्रमशः :— खबर जारी रहेगा।




