टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की आवाज तेज, स्थायी राहत की मांग
शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव से मिला शिक्षक संघर्ष मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल, विभागीय टीईटी सहित पांच सूत्रीय मांगों पर हुई चर्चा

बालोद। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी की बाध्यता से स्थायी राहत देने की मांग तेज कर दी है। राजधानी दिल्ली में देशभर के शिक्षकों के बड़े प्रदर्शन के बीच छत्तीसगढ़ में भी शिक्षक संघर्ष मोर्चा आंदोलन और संवाद के माध्यम से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचा रहा है।
मोर्चा पदाधिकारियों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रदेश के करीब एक लाख सेवारत शिक्षकों की नौकरी, सेवा सुरक्षा और पदोन्नति को लेकर चिंता की स्थिति बनी हुई है।
शिक्षकों का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्त किए गए शिक्षकों पर अब टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
टेट मुक्ति रैलियों के बाद शिक्षामंत्री से चर्चा
मोर्चा के प्रदेशव्यापी आंदोलन और जिला मुख्यालयों में आयोजित टेट मुक्ति रैलियों के बाद प्रदेश के शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए आमंत्रित किया। बैठक में शिक्षामंत्री ने आश्वस्त किया कि किसी भी वरिष्ठ शिक्षक का अहित नहीं होने दिया जाएगा।
साथ ही, कार्यरत शिक्षकों के लिए विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित कर राहत देने के विकल्प पर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।
मोर्चा की ओर से प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे, संजय शर्मा, केदार जैन, धर्मेश शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने शिक्षामंत्री के समक्ष शिक्षकों की चिंताओं और मांगों को विस्तार से रखा।
मोर्चा पदाधिकारियों ने बताया कि 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा। इससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों में नौकरी और पदोन्नति को लेकर असमंजस एवं चिंता का माहौल है।
विभागीय टीईटी कराने की मांग
मोर्चा ने सरकार के समक्ष सुझाव रखा कि यदि टीईटी से पूर्ण छूट देना संभव नहीं है तो कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित की जाए। शिक्षकों ने अगले दो वर्षों में कम से कम चार बार परीक्षा आयोजित करने, पाठ्यक्रम को सेवारत शिक्षकों के अनुरूप रखने, ऑनलाइन प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराने तथा न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 प्रतिशत निर्धारित करने की मांग की।
तमिलनाडु की तर्ज पर विधायी समाधान पर जोर
जिला अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के जितेंद्र शर्मा ने कहा कि तमिलनाडु की तर्ज पर केंद्र और राज्य सरकारों को विधायी पहल करनी चाहिए, ताकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि वर्षों पहले निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के तहत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए नियम को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
शिक्षामंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश
बैठक के दौरान शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव ने विभागीय टीईटी के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और ऐसा समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, जिससे वरिष्ठ शिक्षकों को किसी प्रकार का नुकसान न हो।
इसके अलावा शिक्षक संगठनों ने हायर सेकेंडरी स्कूलों में स्काउट, रेडक्रॉस, योग, व्यायाम एवं नैतिक शिक्षा जैसी गतिविधियों के संचालन के लिए सुबह स्कूल लगाने का प्रस्ताव भी रखा। शिक्षामंत्री ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए आवश्यक आदेश जारी करने का आश्वासन दिया।
पांच सूत्रीय मांगों पर रखा पक्ष
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने शिक्षामंत्री के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं—
टीईटी की बाध्यता से स्थायी मुक्ति के लिए विधायी समाधान।
पूर्व सेवा की गणना कर सभी सेवा हितलाभ प्रदान किए जाएं।
केंद्रीय वेतनमान लागू कर वेतन विसंगति दूर की जाए।
डीएडधारी शिक्षकों के लिए बीएड हेतु ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की जाए।
भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026 में संशोधन अथवा उसे निरस्त किया जाए।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, पदोन्नति एवं अन्य हितलाभों से जुड़े संकट का स्थायी समाधान करेगी।




