बालोद ने रचा जल संरक्षण का नया इतिहास
कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के कुशल नेतृत्व में जनभागीदारी बनी मिसाल, 2.84 लाख से अधिक जल संरचनाओं से बारिश का पानी रोकने की क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
बालोद :- जल संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का बालोद जिला लगातार नई ऊँचाइयों को छू रहा है।

कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित “जल संचय, जनभागीदारी अभियान 2.0” ने जिले को एक और बड़ी उपलब्धि दिलाई है।
प्रशासन और आम जनता की सहभागिता से जिले में जून 2025 से मई 2026 के बीच 2 लाख 84 हजार 917 जल संरक्षण एवं रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिससे वर्षा जल को रोकने और भूजल स्तर बढ़ाने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जनआंदोलन का स्वरूप दिया। उनके नेतृत्व में जिले की ग्राम पंचायतों, विभिन्न विभागों और आम नागरिकों ने मिलकर वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया।

यही कारण है कि वर्तमान मानसून में इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम गांव-गांव में स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं।
अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों में कई नवाचार किए गए हैं।

गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम मुंडेरा में बंद पड़े बोरवेलों के पास रिचार्ज पिट एवं रिचार्ज शाफ्ट बनाकर उन्हें दोबारा उपयोगी बनाया गया है, जिससे भूजल स्तर में लगातार सुधार हो रहा है। वहीं ग्राम कोंगनी में बनाए गए रिचार्ज पिट बहते हुए वर्षा जल को जमीन के भीतर पहुंचाकर जल संरक्षण का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।

इसी प्रकार ओडारसकरी एवं खुटेरी ग्राम पंचायतों में निर्मित चेक डैम बड़ी मात्रा में वर्षा जल को रोक रहे हैं, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है।
भाठागांव (आर) में कंटूर ट्रेंच (खाइयों) के निर्माण से मिट्टी का कटाव कम हुआ है, भूमि में नमी बनी हुई है तथा वृक्षारोपण को भी नई गति मिली है।
जिले भर में बनाए गए सामुदायिक चेक डैम और जल संरचनाओं से खेती-किसानी के साथ-साथ आसपास के गांवों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। जो संरचनाएं मानसून से पहले सूखी थीं, वे अब पानी से लबालब भर चुकी हैं।

तवेरा नाला बना जनभागीदारी का राष्ट्रीय मॉडल
जल संचय अभियान की सबसे बड़ी सफलता गुण्डरदेही विकासखंड के भाठागांव (आर) स्थित 14.3 किलोमीटर लंबे तवेरा नाला का पुनरुद्धार है।
कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा की विशेष पहल पर कैच द रेन एवं जल संचय जनभागीदारी अभियान के तहत इस नाले को नया जीवन मिला। यहां 6,250 से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं जैसे चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, मैजिक पिट, सोख्ता गड्ढे, इंजेक्शन वेल और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किए गए हैं।
इन कार्यों से लगभग 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल का संचय संभव होगा तथा भूजल स्तर में 5 से 10 फीट तक वृद्धि होने की संभावना है। इससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, किसानों को लाभ मिलेगा तथा पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी।
पहले भी देशभर में मिला था सम्मान

जल संरक्षण के क्षेत्र में बालोद की उपलब्धियां पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर सराही जा चुकी हैं। जल संचय, जनभागीदारी अभियान 1.0 के दौरान जिले में 1.06 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया था।

इस उत्कृष्ट कार्य के लिए कैच द रेन अभियान में बालोद को देश में तीसरा तथा पूर्वी भारत में पहला स्थान प्राप्त हुआ था। इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भी बालोद जिले को सम्मानित किया था।
आज कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के प्रभावी नेतृत्व में बालोद जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरा है।
जिले ने यह साबित किया है कि जब प्रशासन और जनता मिलकर कार्य करते हैं, तो जल संकट जैसी गंभीर समस्या का भी स्थायी समाधान संभव है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “पानी की हर बूंद बचाने” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाते हुए बालोद ने जल संरक्षण को एक सफल जनआंदोलन का रूप दे दिया है।




