Sunday, August 30, 2026

विष्णु के सुशासन में नई राह पर बढ़तीं सुकमा की बेटियां: चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने रायपुर के बड़े मंच पर दिखाया हुनर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बढ़ाया बेटियों का हौसला

 

विष्णु के सुशासन में नई राह पर बढ़तीं सुकमा की बेटियां: चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने रायपुर के बड़े मंच पर दिखाया हुनर
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बढ़ाया बेटियों का हौसला

रायपुर :–  छत्तीसगढ़ में सुशासन, आत्मनिर्भरता और पुनर्वास की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। ग्रामोद्योग विभाग की पहल पर सुकमा जिले के चिंतलनार क्षेत्र की पुनर्वासित (आत्मसमर्पित) बेटियों ने पहली बार राजधानी रायपुर के बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं ग्रामोद्योग विभाग की स्वदेशी प्रदर्शनी में आयोजित फैशन शो में इन बेटियों ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।


कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।


₹10.90 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में पात्र बुनकर परिवारों को विभिन्न योजनाओं के तहत ₹10.90 करोड़ से अधिक की सहायता राशि प्रदान की गई।

अतिथियों ने बुनकरों द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट हस्तकरघा उत्पादों का अवलोकन किया और प्रदेश में सर्वाधिक उत्पादन करने वाले बुनकरों को ‘वरिष्ठ बुनकर सम्मान’ से सम्मानित किया।

कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के हस्तकरघा एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को नई पहचान देने की दिशा में ‘कोशल फेब’ और ‘बिलासा’ ब्रांड के लोगो का भी शुभारंभ किया गया।
पुनर्वासित बेटियों ने रैंप पर बिखेरा आत्मविश्वास
समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण उस समय आया, जब सुकमा के चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने मिस इंडिया ईस्ट सुश्री अनुष्का सोन के साथ पारंपरिक छत्तीसगढ़ी हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक किया।


इस फैशन शो में पुनेम देवे, माड़वी देवे, माड़वी माल्ले, मिडियम गांगी, कुमारी माड़वी नान्दनी, कुमारी डोंडी रामे, कुमारी माड़काम भीमे, कुमारी पोड़ियाम राजे, कुमारी पुनेम ज्योति और कुमारी हिड़मे मारकाम ने सहभागिता की।


इन बेटियों ने न केवल पारंपरिक परिधानों को मंच पर प्रस्तुत किया, बल्कि अपने आत्मविश्वास और नए जीवन की उम्मीद का भी परिचय दिया। कभी हिंसा और असुरक्षा के माहौल से जुड़ी रही इन बेटियों का राजधानी के मंच पर पूरे आत्मविश्वास के साथ सामने आना पुनर्वास की सार्थकता और बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा गया।


फैशन शो नहीं, बदलाव की नई कहानी
यह आयोजन महज फैशन शो तक सीमित नहीं रहा। इस पहल ने यह संदेश दिया कि सही अवसर, मार्गदर्शन और सम्मान मिलने पर पुनर्वासित बेटियां भी समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़कर अपनी पहचान बना सकती हैं।
हिंसा से विकास की ओर, भय से विश्वास की ओर और भटके हुए जीवन से सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की यह तस्वीर कार्यक्रम में स्पष्ट दिखाई दी।
छत्तीसगढ़ में यह पहला अवसर रहा, जब ग्रामोद्योग विभाग की पहल पर चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों को राजधानी रायपुर के इतने बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने बढ़ाया हौसला
पुनर्वासित बेटियों की इस प्रस्तुति से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी प्रभावित हुए। दोनों ने ग्रामोद्योग विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की और मंच पर पहुंचकर बेटियों से मुलाकात की। उन्होंने उनका हौसला बढ़ाया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर हाथकरघा संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पांडेय, ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
यह पहल बताती है कि पुनर्वास केवल मुख्यधारा में लौटने तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मान, आत्मनिर्भरता और अपनी प्रतिभा को पहचान दिलाने तक की यात्रा है। चिंतलनार की बेटियों का रायपुर के मंच तक पहुंचना इसी बदलाव की एक प्रेरक तस्वीर बनकर सामने आया।

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