सेवा से संकल्प तक: बालोद में महिला नेतृत्व की नई तस्वीर, कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की कार्यशैली ने प्रशासन को जनसेवा से जोड़ा
जल संरक्षण में राष्ट्रीय सम्मान से लेकर सेवा संकल्प अभियान तक—मैदानी काम, जनभागीदारी और त्वरित कार्रवाई पर जोर

बालोद। प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल कार्यालयों की फाइलों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जब उसका असर गांव, गरीब, किसान, महिला, दिव्यांग और आम नागरिक के जीवन में दिखाई देने लगे, तब वह जनसेवा का रूप ले लेती है। बालोद जिले में कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा की कार्यशैली को इसी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। महिला प्रशासनिक नेतृत्व के रूप में उनकी कार्यप्रणाली में योजनाओं की निगरानी के साथ-साथ मैदानी स्तर पर उनके क्रियान्वयन, जनभागीदारी और समयबद्ध समाधान पर जोर दिखाई देता है।
सेवा संकल्प को बनाया जनभागीदारी का अभियान
बालोद जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के लिए कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा को जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। अभियान का उद्देश्य शासकीय योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ जनसेवा की गतिविधियों को गति देना है।
कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अभियान महज औपचारिक सरकारी कार्यक्रम बनकर न रह जाए, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने समयबद्ध कार्ययोजना, विभागीय समन्वय और योजनाओं के पात्र हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया है।
‘सेवा मेरा योगदान’ में खुद मैदान में उतरा प्रशासन
सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम में संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में स्वच्छता एवं श्रमदान गतिविधियां आयोजित की गईं। इसमें कलेक्टर सहित अधिकारी-कर्मचारियों ने सहभागिता की और स्वच्छता को दैनिक कार्यशैली का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
यह कार्यशैली प्रशासन और आम जनता के बीच दूरी कम करने वाले प्रयास के रूप में सामने आती है। संदेश साफ है कि जनसेवा केवल निर्देश देने तक सीमित नहीं, बल्कि जिम्मेदारी को व्यवहार में उतारने से पूरी होती है।
जल संरक्षण में बालोद को मिला राष्ट्रीय सम्मान
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के कार्यकाल में बालोद जिले ने जल संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर भी उपलब्धि हासिल की। ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान के तहत बालोद ने पूर्वी जोन में देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले के रूप में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जिले की ओर से कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने राष्ट्रपति के हाथों सम्मान ग्रहण किया। इस उपलब्धि के साथ जिले को 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।
जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले में बड़ी संख्या में नई जल संरचनाओं का निर्माण, पुराने जल स्रोतों की मरम्मत एवं सफाई तथा वाटर रिचार्ज पिट जैसे कार्य किए गए। बाद में भी ‘नीर चेतना अभियान’ के माध्यम से जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, फसल चक्र परिवर्तन और पौधारोपण जैसे कार्यों पर प्रशासन ने जोर जारी रखा।
महिला नेतृत्व, संवेदनशीलता और निर्णय क्षमता का मेल
एक महिला आईएएस अधिकारी के रूप में कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की कार्यशैली में प्रशासनिक अनुशासन के साथ संवेदनशीलता और जनसमस्याओं को सुनने की प्राथमिकता दिखाई देती है। जनदर्शन से लेकर विभागीय समीक्षा बैठकों तक, उनका जोर समस्या को केवल दर्ज करने के बजाय उसके समाधान की दिशा में जिम्मेदारी तय करने पर रहता है।
जिले में दिव्यांग हितग्राहियों को त्वरित सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, राजस्व प्रकरणों के निराकरण, स्वच्छता और जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा जैसे विषयों पर प्रशासनिक स्तर पर लगातार गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।
फाइलों से आगे बढ़कर मैदानी प्रशासन की कोशिश
कलेक्टर की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के साथ मैदानी स्थिति पर भी ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण हो या राजस्व संबंधी मामलों की समीक्षा, प्रशासनिक अमले को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं।
सेवा संकल्प अभियान में भी इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए जल संरक्षण, जनसमस्याओं के समाधान, स्वच्छता, जनजागरूकता और शासकीय योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाने को अभियान का हिस्सा बनाया गया है।
बालोद की तस्वीर में महिला नेतृत्व की मजबूत छाप
बालोद की प्रशासनिक यात्रा में कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा का कार्यकाल सेवा, जनभागीदारी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को केंद्र में रखने वाला दिखाई देता है। जल संरक्षण में राष्ट्रीय सम्मान जैसी उपलब्धि से लेकर वर्तमान सेवा संकल्प अभियान तक, प्रशासन की प्राथमिकताओं में जनभागीदारी, संवेदनशीलता, जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यशैली प्रमुख रूप से सामने आती है।
एक महिला प्रशासनिक अधिकारी के नेतृत्व में जब योजनाएं कागज से निकलकर गांव और आम नागरिक तक पहुंचती हैं, तो महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल महिलाओं के लिए योजनाएं बनाना नहीं रह जाता, बल्कि महिला नेतृत्व द्वारा विकास और जनसेवा की दिशा तय करना भी उसका महत्वपूर्ण उदाहरण बन जाता है।




