Tuesday, October 27, 2026

गारंटी अवधि में ही उखड़ने लगी शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क, ठेकेदारों पर कार्रवाई; NH के 6 उप अभियंता भी घेरे में शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क की बदहाली पर PWD का शिकंजा, ठेकेदारों को नोटिस; NH 930 के 6 उप अभियंताओं से भी जवाब तलब परफॉर्मेंस गारंटी में होने के बावजूद उखड़ने लगी सड़क, अधूरे और गुणवत्ताहीन निर्माण ने खोली रखरखाव व्यवस्था की पोल; जांच के बाद विभाग की कार्रवाई, ठेकेदारों को 15 दिन और उप अभियंताओं को 3 दिन की मोहलत

गारंटी अवधि में ही उखड़ने लगी शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क, ठेकेदारों पर कार्रवाई; NH के 6 उप अभियंता भी घेरे में

शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क की बदहाली पर PWD का शिकंजा, ठेकेदारों को नोटिस; NH 930 के 6 उप अभियंताओं से भी जवाब तलब

परफॉर्मेंस गारंटी में होने के बावजूद उखड़ने लगी सड़क, अधूरे और गुणवत्ताहीन निर्माण ने खोली रखरखाव व्यवस्था की पोल; जांच के बाद विभाग की कार्रवाई, ठेकेदारों को 15 दिन और उप अभियंताओं को 3 दिन की मोहलत

बालोद, :—- शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क के अधूरे निर्माण, कथित गुणवत्ताहीन कार्यों और सड़क की उखड़ती सतह ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली और सड़क रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सड़क की गुणवत्ता और मजबूती सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदारों तथा विभागीय निगरानी तंत्र की है, उसी सड़क पर निर्माण के बाद क्षति सामने आने और रखरखाव में लापरवाही के मामले में अब विभाग ने कार्रवाई शुरू की है। लोक निर्माण विभाग ने दो ठेकेदारों को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बालोद के सभी छह उप अभियंताओं को भी कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिनों में अपना प्रतिवाद प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण और कार्यों की जांच के बाद सामने आई कमियों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। विभाग ने निर्माण की गुणवत्ता, सड़क के रखरखाव, सड़क सुरक्षा और निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य किए जाने से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। खास बात यह है कि संबंधित सड़क अभी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में है। ऐसे में सड़क की सतह का क्षतिग्रस्त होना और रखरखाव को लेकर शिकायतें सामने आना निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ-साथ विभागीय निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है।

परफॉर्मेंस गारंटी में सड़क उखड़ने से उठे सवाल, जिम्मेदारी तय करने की कवायद

सड़क निर्माण के बाद निर्धारित अवधि तक उसकी गुणवत्ता और टिकाऊपन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है। परफॉर्मेंस गारंटी का उद्देश्य भी यही है कि निर्माण कार्य में सामने आने वाली कमियों और निर्धारित शर्तों के तहत आवश्यक सुधारात्मक कार्यों के लिए संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जा सके।

लेकिन शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क के मामले में निर्माण के बाद सड़क की सतह पर क्षति और रखरखाव संबंधी कमियां सामने आने से व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। यदि कोई सड़क परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में ही उखड़ने लगे, तो स्वाभाविक रूप से निर्माण की गुणवत्ता, सामग्री के उपयोग, तकनीकी मानकों के पालन और समय पर मरम्मत जैसे पहलुओं की जांच जरूरी हो जाती है।

विभाग की ओर से जारी नोटिस इसी जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में किसी ठेकेदार या अधिकारी को दोषी साबित नहीं करता। संबंधित पक्षों के जवाब और विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही अंतिम जिम्मेदारी तय होगी।

ठेकेदारों की लापरवाही के आरोपों पर विभाग सख्त, 15 दिनों में देना होगा जवाब

लोक निर्माण विभाग ने सड़क के अधूरे और गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों तथा उखड़ी सड़क को लेकर दो ठेकेदारों को नोटिस जारी किया है। दोनों ठेकेदारों से 15 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है।

इस कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित ठेकेदार सड़क निर्माण में सामने आई कमियों को लेकर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और विभाग उन जवाबों के आधार पर आगे क्या कदम उठाता है। यदि जांच में निर्माण संबंधी खामियां प्रमाणित होती हैं, तो अनुबंध की शर्तों और लागू नियमों के अनुसार सुधारात्मक कार्रवाई तथा जवाबदेही तय करने का प्रश्न महत्वपूर्ण होगा।

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता केवल सरकारी धन के उपयोग का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा से भी है। खराब सड़कें वाहन चालकों, दोपहिया सवारों और स्थानीय लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि निर्माण कार्यों की नियमित जांच हो और खामियां सामने आने पर उनका समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

NH के छह उप अभियंताओं को भी नोटिस, तीन दिनों में मांगा प्रतिवाद

इस पूरे मामले में विभाग ने केवल ठेकेदारों तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। परफॉर्मेंस गारंटी अवधि वाली सड़क के खराब रखरखाव को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बालोद के सभी छह उप अभियंताओं को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

संबंधित उप अभियंताओं को तीन दिनों के भीतर अपना प्रतिवाद प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।

यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सड़क निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ कार्यों की निगरानी, निर्धारित मानकों के पालन की जांच और सड़क की स्थिति पर नजर रखना भी विभागीय व्यवस्था का अहम हिस्सा है। परफॉर्मेंस गारंटी में सड़क की सतह क्षतिग्रस्त होने के मामले में यह जानना आवश्यक होगा कि निरीक्षण और निगरानी के दौरान कमियों को कब चिह्नित किया गया, सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए और सड़क की वर्तमान स्थिति को लेकर जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है।

छह उप अभियंताओं को नोटिस जारी किए जाने से विभागीय निगरानी व्यवस्था की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। अब उनके जवाबों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सड़क की स्थिति को लेकर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई थी और किन परिस्थितियों में कमियां सामने आईं।

निरीक्षण के बाद कार्रवाई, लेकिन सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव पर जवाब जरूरी

राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के अधिकारियों के निरीक्षण और जांच के बाद नोटिस जारी होना यह दर्शाता है कि सड़क निर्माण से संबंधित शिकायतों और कमियों को लेकर विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि, इस मामले का वास्तविक समाधान केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। सड़क की स्थिति में सुधार, कमियों का तकनीकी परीक्षण और जवाबदेही का निष्पक्ष निर्धारण भी उतना ही आवश्यक है।

यदि सड़क पर निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण नहीं हुआ है या परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में जरूरी रखरखाव नहीं किया गया है, तो संबंधित अनुबंध की शर्तों के तहत सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही, सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

सड़क निर्माण के कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि निरीक्षण की रिपोर्ट, कमियों का तकनीकी आकलन और सुधारात्मक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो। इससे न केवल संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकेंगे।

अब जवाबदेही तय होने का इंतजार

शेरपार-मानपुर-कोहका सड़क का मामला अब ठेकेदारों के जवाब और छह उप अभियंताओं के प्रतिवाद के बाद आगे बढ़ेगा। ठेकेदारों को 15 दिनों के भीतर और उप अभियंताओं को तीन दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करना है। इसके बाद विभागीय स्तर पर जवाबों की समीक्षा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

इस मामले ने एक बार फिर सड़क निर्माण में गुणवत्ता, परफॉर्मेंस गारंटी के दौरान रखरखाव और विभागीय निगरानी की अहमियत सामने रखी है। अब सवाल केवल नोटिस जारी होने का नहीं, बल्कि यह है कि सड़क की बदहाल स्थिति में सुधार कब होगा, निर्माण एवं रखरखाव की कमियों के लिए जिम्मेदारी कैसे तय होगी और आम लोगों को सुरक्षित तथा बेहतर सड़क सुविधा कब मिल पाएगी।

सड़क निर्माण में सरकारी धन का उपयोग तभी सार्थक है, जब सड़क निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप बने, गारंटी अवधि में उसका उचित रखरखाव हो और किसी भी कमी पर समय रहते जवाबदेही तय की जाए।

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