Wednesday, October 28, 2026

डौंडी के खनन प्रभावित आदिवासी गांवों की समस्याओं को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता राकेश यादव जनसेवक ने उठाई आवाज पथराटोला में प्रस्तावित 5 करोड़ रुपये के विज्ञान केंद्र की योजना पर पुनर्विचार की मांग, जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य रोकने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखा पत्र लाल पानी, सुरक्षित पेयजल, सड़क-नाली और रोजगार को प्राथमिकता देने की अपील; परियोजना की लागत, फंडिंग, स्वीकृति प्रक्रिया और संभावित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग

डौंडी के खनन प्रभावित आदिवासी गांवों की समस्याओं को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता राकेश यादव जनसेवक ने उठाई आवाज

पथराटोला में प्रस्तावित 5 करोड़ रुपये के विज्ञान केंद्र की योजना पर पुनर्विचार की मांग, जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य रोकने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखा पत्र

लाल पानी, सुरक्षित पेयजल, सड़क-नाली और रोजगार को प्राथमिकता देने की अपील; परियोजना की लागत, फंडिंग, स्वीकृति प्रक्रिया और संभावित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग

बालोद/डौंडी। जिले के डौंडी विकासखंड के खनन प्रभावित एवं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता राकेश यादव जनसेवक ने जनहित का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर ग्राम पथराटोला में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित विज्ञान केंद्र की परियोजना की आवश्यकता, उपयोगिता, वित्तपोषण एवं स्वीकृति प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने जांच पूरी होने तक प्रस्तावित निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने तथा खनन प्रभावित गांवों की बुनियादी समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

राकेश यादव जनसेवक ने अपने पत्र में कहा है कि डौंडी विकासखंड के अनेक ग्रामीण परिवार आज भी सुरक्षित पेयजल, लाल पानी की समस्या, खराब सड़कों, नालियों, जल निकासी, स्वच्छता और रोजगार जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में किसी बड़ी निर्माण परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सार्वजनिक धन का उपयोग स्थानीय जनता की वास्तविक जरूरतों और व्यापक जनहित के अनुरूप हो।

5 करोड़ की परियोजना पर पुनर्विचार की मांग

भाजपा के वरिष्ठ नेता राकेश यादव जनसेवक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पथराटोला में प्रस्तावित विज्ञान केंद्र की वास्तविक लागत, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, वित्तपोषण के स्रोत और परियोजना चयन के आधार की जांच कराई जाए।

उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया है कि विज्ञान शिक्षा या वैज्ञानिक गतिविधियों का विरोध उनका उद्देश्य नहीं है। उनका कहना है कि विकास की योजनाओं का निर्धारण क्षेत्र की आवश्यकताओं, स्थानीय लोगों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग को ध्यान में रखकर होना चाहिए।

परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, इसकी वास्तविक लागत, स्वीकृति की स्थिति और राशि किस मद से उपलब्ध कराई जाएगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इसलिए शासन से इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी और निष्पक्ष परीक्षण कराने का अनुरोध किया गया है।

DMF निधि के उपयोग पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग

राकेश यादव जनसेवक ने मुख्यमंत्री से यह भी स्पष्ट कराने की मांग की है कि प्रस्तावित विज्ञान केंद्र के निर्माण में जिला खनिज न्यास (DMF/DMFT) निधि का उपयोग किया जा रहा है या नहीं। यदि इस निधि से राशि खर्च करने का प्रस्ताव है, तो उसके औचित्य, संबंधित स्वीकृति और लागू प्रावधानों के अनुरूप उपयोग की समीक्षा की जाए।

खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करते समय ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकताओं और प्रभावित परिवारों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ को पर्याप्त महत्व दिए जाने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया है।

उन्होंने परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), लागत अनुमान, वित्तपोषण के स्रोत, स्वीकृति प्रक्रिया, निविदा और कार्य आवंटन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग भी रखी है।

लाल पानी की समस्या का वैज्ञानिक समाधान हो

डौंडी क्षेत्र में लाल पानी की समस्या को गंभीर विषय बताते हुए राकेश यादव जनसेवक ने प्रभावित गांवों के जल स्रोतों और पेयजल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पानी के रंग के आधार पर उसके कारण या स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का निष्कर्ष निकालने के बजाय उसकी गुणवत्ता की प्रयोगशाला में जांच कराई जानी चाहिए।

जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित गांवों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक जल स्रोत विकसित करने और जल शोधन की व्यवस्था करने की मांग की गई है। साथ ही समस्या के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने का आग्रह किया गया है।

उनका कहना है कि स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल प्रत्येक परिवार की बुनियादी जरूरत है। इसलिए खनन प्रभावित गांवों में पेयजल की समस्या का निराकरण शासन की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

सड़क, नाली और बुनियादी सुविधाओं का गांववार सर्वेक्षण हो

राकेश यादव जनसेवक ने डौंडी विकासखंड के खनन प्रभावित एवं आदिवासी गांवों में सड़कों, नालियों, जल निकासी, स्वच्छता और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं की स्थिति का गांववार सर्वेक्षण कराने की मांग की है।

उन्होंने सुझाव दिया है कि जिन गांवों में सड़कें खराब हैं, नालियों का अभाव है या जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां जरूरत और समस्या की गंभीरता के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकता तय की जाए।

उनके अनुसार, विकास योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाना और उन्हें आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर समस्याओं की पहचान कर योजनाबद्ध तरीके से काम करना आवश्यक है।

स्थानीय युवाओं के रोजगार और आजीविका पर जोर

पत्र में रोजगार और आजीविका के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया है। राकेश यादव जनसेवक ने कहा है कि खनन प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार, कृषि आधारित गतिविधियों और रोजगारोन्मुख योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने प्रस्तावित विज्ञान केंद्र से स्थानीय विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों को मिलने वाले प्रत्यक्ष एवं दीर्घकालीन लाभ का वस्तुनिष्ठ आकलन कराने का आग्रह किया है। साथ ही यह भी विचार करने की मांग की है कि उपलब्ध संसाधनों से पेयजल, सड़क, नाली, रोजगार और आजीविका संबंधी आवश्यकताओं को किस प्रकार अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकता है।

परियोजना के चयन और कार्य आवंटन की निष्पक्ष जांच की मांग

राकेश यादव जनसेवक ने पत्र में परियोजना चयन, स्वीकृति और कार्य आवंटन की प्रक्रिया को लेकर संभावित पक्षपात अथवा हितों के टकराव की आशंकाओं की निष्पक्ष जांच कराने का भी अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा है कि इस संबंध में किसी व्यक्ति को बिना जांच दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित दस्तावेजों एवं तथ्यों का परीक्षण आवश्यक है।

उन्होंने मांग की है कि परियोजना की लागत, DPR, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की नियमानुसार समीक्षा की जाए। यदि जांच में अनियमितता, नियमों का उल्लंघन या किसी को अनुचित लाभ पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही निर्धारित कर कार्रवाई की जाए।

निर्माण के बाद संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी हो स्पष्ट

भाजपा के वरिष्ठ नेता राकेश यादव जनसेवक ने विज्ञान केंद्र की दीर्घकालीन उपयोगिता पर भी सवाल उठाते हुए उसके संचालन और संधारण की ठोस व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना की उपयोगिता केवल भवन के निर्माण तक सीमित नहीं होती। उसके संचालन, बिजली, उपकरणों के रखरखाव, कर्मचारियों और अन्य वार्षिक खर्चों के लिए भी नियमित बजट की आवश्यकता होती है।

इसलिए परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि विज्ञान केंद्र का संचालन कौन करेगा, उसके लिए प्रतिवर्ष कितनी राशि की आवश्यकता होगी, आवश्यक कर्मचारी एवं उपकरण कैसे उपलब्ध कराए जाएंगे और स्थानीय विद्यार्थियों को इससे किस प्रकार लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री से की गईं प्रमुख मांगें

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को लिखे पत्र में राकेश यादव जनसेवक ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं—

  1. पथराटोला में प्रस्तावित विज्ञान केंद्र के निर्माण कार्य पर जांच पूरी होने तक तत्काल रोक लगाने पर आवश्यक निर्णय लिया जाए।
  2. परियोजना की वास्तविक लागत, वित्तपोषण के स्रोत, स्वीकृति प्रक्रिया और जनोपयोगिता की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  3. DMF/DMFT निधि के उपयोग की स्थिति स्पष्ट कराई जाए तथा यदि इस निधि का उपयोग प्रस्तावित है, तो उसके औचित्य एवं नियमानुसार उपयोग की समीक्षा की जाए।
  4. परियोजना की DPR, लागत अनुमान, निविदा, कार्यादेश और कार्य आवंटन की प्रक्रिया का परीक्षण किया जाए।
  5. संभावित पक्षपात, हितों के टकराव या अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  6. विज्ञान केंद्र के संचालन, संधारण, कर्मचारियों, उपकरणों और वार्षिक खर्च की व्यवस्था का आकलन किया जाए।
  7. खनन प्रभावित गांवों में लाल पानी की समस्या और पेयजल की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराकर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
  8. ग्रामीण सड़कों, नालियों, जल निकासी, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी जाए।
  9. स्थानीय आदिवासी परिवारों और युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार एवं आजीविका मूलक योजनाओं को प्रभावी बनाया जाए।
  10. जांच में अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
  11. शिकायत पर की गई कार्रवाई, जांच की समयसीमा और अंतिम निर्णय से शिकायतकर्ता को लिखित रूप में अवगत कराया जाए।

“विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे” — राकेश यादव जनसेवक

राकेश यादव जनसेवक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस मामले को गंभीर जनहित के विषय के रूप में लेते हुए परियोजना की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और खनन प्रभावित आदिवासी गांवों की समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।

उन्होंने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य विज्ञान शिक्षा का विरोध करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन का उपयोग पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित कराना और विकास की प्राथमिकताओं में स्थानीय जनता की वास्तविक आवश्यकताओं को महत्व दिलाना है।

उन्होंने उम्मीद जताई है कि राज्य शासन इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगा तथा डौंडी क्षेत्र के खनन प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल, बेहतर सड़क, नाली, रोजगार और आजीविका जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएगा।

अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय एवं संबंधित विभाग इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और प्रस्तावित विज्ञान केंद्र की लागत, वित्तपोषण एवं जनोपयोगिता को लेकर स्थिति कब तक स्पष्ट होती है।

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