बालोद बनेगा देश का पहला ‘सौर ऊर्जा आत्मनिर्भर जिला’: 28 ग्राम पंचायतों में शुरू होगी दिनकर पायलट परियोजना

बालोद: जिले में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा “दिनकर पायलट परियोजना” के तहत 28 ग्राम पंचायतों में बड़े स्तर पर रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। राज्य शासन से स्वीकृति मिलने के बाद अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से कार्य शुरू किया जा रहा है।
यह परियोजना न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकती है। इस परियोजना के तहत “ग्राम पंचायत सौर शक्ति प्रकल्प” के रूप में वर्चुअल नेट मीटरिंग मॉडल अपनाया जाएगा। इसके अंतर्गत कुल 1,365 किलोवाट पीक (KWP) क्षमता के ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। ये प्लांट पंचायतों के विभिन्न सरकारी भवनों की छतों पर लगाए जाएंगे और वहीं से उत्पादित बिजली का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जाएगा।
इन पंचायतों में लगेगा सोलर प्लांट- परियोजना के अंतर्गत उकारी, कमकापार, सिवनी, नारागांव, भैसबोड़, कुसुमकसा, गुजरा, चिखली, दानीटोला, धुर्वाटोला, गिधाली, अड़जाल, कामता, कोपडेरा, कोटागांव, कुमुड़कट्टा, कुआंगोंदी, मरकाटोला, नकलसा, नर्राटोला, पटेली, पथराटोला, सिंघोला, मरकाटोला (स), किल्लेकोड़ा, चिखली और गैंजी सहित कुल 28 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।
सरकारी संस्थानों के बिजली खर्च में आएगी भारी कमी-
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों में स्थित सरकारी सुविधाओं जैसे नलजल योजना, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक शौचालय, सामुदायिक भवन, स्कूल, छात्रावास, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पुलिस थाना, धान संग्रहण केंद्र आदि के बिजली खर्च को कम करना है। सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली इन सभी सेवाओं की जरूरतों को पूरा करेगी।
25 वर्षों में 22.79 करोड़ रुपये की बचत- कलेक्टर दिव्या मिश्रा की माने तो परियोजना के तहत हर वर्ष लगभग 14 लाख 27 हजार 640 यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। इससे सालाना करीब 91 लाख 20 हजार रुपये की बचत होगी। दीर्घकालिक दृष्टि से देखें तो अगले 25 वर्षों में लगभग 22.79 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। इस परियोजना की कुल लागत 10.98 करोड़ रुपये है, जो लगभग 12 वर्षों में वसूल हो जाएगी।
10 वर्षों तक एजेंसी करेगी मेंटेनेंस- कलेक्टर दिव्या मिश्रा के अनुसार, परियोजना की टेंडर प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। चयनित एजेंसी को 10 वर्षों तक सोलर प्लांट का रखरखाव करना होगा। हालांकि सोलर प्लांट में मेंटेनेंस की आवश्यकता कम होती है और मुख्य रूप से पैनलों की सफाई ही जरूरी होती है। आगे चलकर एएमसी (वार्षिक रखरखाव) का खर्च भी बचत से ही पूरा किया जाएगा।
‘अपनी बिजली खुद बनाएं’ योजना का मुख्य उद्देश्य-
यह पहल केंद्र सरकार की “प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना” के अंतर्गत की जा रही है। इसका उद्देश्य लोगों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। वर्चुअल नेट मीटरिंग के तहत यह जरूरी नहीं कि सोलर प्लांट उपभोक्ता के घर या परिसर में ही हो, यह कहीं भी स्थापित किया जा सकता है, बशर्ते वह संबंधित विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्र में हो। देश के लिए मॉडल बनेगा बालोद- दिनकर परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद बालोद जिला देश में एक नई मिसाल कायम करेगा। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ बिजली खर्च में कमी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।




