Wednesday, June 10, 2026

जिला संग्रहण केन्द्रों से धान उठाव के मात्रा में बालोद जिला पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर कलेक्टर के निर्देश पर समय पर धान उठाव हेतु युद्ध स्तर पर किए जा रहे कार्य, धान के उचित रखरखाव हेतु की गई है समुचित व्यवस्था जिले के सभी 04 धान संग्रहण केन्द्रों में धान का उठाव कार्य निरंतर जारी

 

जिला संग्रहण केन्द्रों से धान उठाव के मात्रा में बालोद जिला पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर
कलेक्टर के निर्देश पर समय पर धान उठाव हेतु युद्ध स्तर पर किए जा रहे कार्य, धान के उचित रखरखाव हेतु की गई है समुचित व्यवस्था
जिले के सभी 04 धान संग्रहण केन्द्रों में धान का उठाव कार्य निरंतर जारी

बालोद, :– खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी कार्य के अंतर्गत संग्रहण केन्द्रों से धान उठाव में बालोद जिला पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर है। जिला विपणन अधिकारी ने बताया कि इसके अंतर्गत बालोद जिले के जगतरा, धोबनपुरी, फुण्डाभाठा एवं मालीघोरी सहित जिले के सभी चारों धान संग्रहण केन्द्रों से धान उठाव का कार्य निरंतर जारी है।

कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले के सभी चारों धान संग्रहण केन्द्रों से समय पर धान का उठाव सुनिश्चित करने संबंधित विभागों के द्वारा युद्ध स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

कलेक्टर श्रीमती मिश्रा के निर्देशानुसार मिलर्स एवं क्रेताओं के द्वारा नियमित रूप से सभी चारों संग्रहण केन्द्रों से धान का उठाव किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बालोद जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान में से कुल 02 लाख 38 हजार 152 मेट्रिक टन से अधिक धान का भण्डारण जगतरा, धोबनपुरी, फुण्डाभाठा एवं मालीघोरी सहित जिले के सभी चार संग्रहण केन्द्रों में किया गया है।

जिसमें से अब तक कुल 01 लाख 49 हजार 173 मेट्रिक टन से अधिक धान का उठाव कर लिया गया है। इसके साथ ही उठाव हेतु शेष 88 हजार 979 मेट्रिक टन धान का उठाव का कार्य निरंतर जारी है। जिला विपणन अधिकारी ने बताया कि जिले के सभी चारों संग्रहण केन्द्रों से मिलर्स एवं क्रेताओं के द्वारा प्रतिदिन लगभग 05 हजार मेट्रिक टन धान का उठाव किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने बताया कि जिले के सभी संग्रहण केन्द्रों में उठाव हेतु शेष रह गए बचत भण्डारित धान की उचित रखरखाव की भी समुचित व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत संग्रहण केन्द्रों में शेष बचत भण्डारित धान के स्टेकों को सुरक्षित रखने के लिए अच्छी तरह से कैप कव्हर में ढककर रखा गया है।

इसके साथ ही जल निकासी हेतु स्टेकों के पास नाली भी बनाया गया है। जिससे कि बारिश से स्टेको के पास जल भराव न हो। इसके अलावा धान के स्टेकों को दीमक एवं चुहे से बचाने के लिए दीमक नाशक एवं चुहा नाशक दवाईयों का भी छिड़काव किया जा रहा है।

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