राजाराव पठार में आदिवासी संग्रहालय के लिए 10 करोड़ की मांग, राकेश यादव ने मुख्यमंत्री साय को सौंपा पत्र

बालोद/गुरुर, 25 अगस्त 2026। बालोद जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल राजाराव पठार को आदिवासी संस्कृति और विरासत के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। संजारी बालोद के जनसेवक एवं पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र सौंपकर राजाराव पठार, तहसील गुरुर में आदिवासी संग्रहालय एवं उससे संबंधित निर्माण कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान की स्वीकृति प्रदान करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में राकेश यादव ने उल्लेख किया है कि बालोद जिले में स्थित राजाराव पठार एक ऐतिहासिक वीरभूमि है, जहां बाबा राजाराव विराजमान हैं। यह स्थान बालोद, धमतरी एवं कांकेर सहित आसपास के क्षेत्रों के लाखों आदिवासी परिवारों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
शहीद वीर नारायण सिंह की शहादत से जुड़ा है स्थल
पत्र में बताया गया है कि राजाराव पठार में प्रतिवर्ष 8 से 10 दिसंबर तक वीर मेला आयोजित होता है। यह आयोजन शहीद वीर नारायण सिंह के शहादत दिवस के अवसर पर होता है और इसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल होते हैं।
राकेश यादव ने पत्र में कहा है कि वीर मेला आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने भी राजाराव पठार में आदिवासी संग्रहालय के निर्माण की आवश्यकता को लेकर उनसे चर्चा की है। संग्रहालय बनने से क्षेत्र की आदिवासी संस्कृति, परंपरा, इतिहास, लोककला और विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री से बजट स्वीकृति की अपील
राकेश यादव ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आग्रह किया है कि बालोद जिले की जनभावनाओं और आदिवासी समाज की आस्था को ध्यान में रखते हुए राजाराव पठार में आदिवासी संग्रहालय एवं संबंधित निर्माण कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये की राशि का बजट में प्रावधान कर स्वीकृति प्रदान की जाए।
उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आदिवासी संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और परंपराओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। इससे राजाराव पठार को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
राकेश यादव की इस मांग को क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा राजाराव पठार के समग्र विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। अब क्षेत्रवासियों की नजर मुख्यमंत्री स्तर से इस मांग पर होने वाली कार्रवाई और प्रस्तावित बजट स्वीकृति पर है।




