तुएंगोंदी में शांतिपूर्ण तरीके से हुआ देव जातरा कार्यक्रम संपन्न
कुँवर लाल निवेंद्र सिंह टेकाम ने जताया मुख्यमंत्री का आभार

बालोद :– बालोद जिले में स्थित तुएंगोंदी में शनिवार 20 जून को आदिवासियों द्वारा देव जातरा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
आयोजन से पहले बालोद जिले के कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल सहित आदिवासियों के बड़े नेता और राजा लाल निवेंद्र सिंह टेकाम मौजूद रहे।

जहां आदिवासियों द्वारा आयोजित किए जाने वाले देव जातरा के बाद में उन्होंने बारीकी से जानकारी ली और विश्लेषण करने के बाद कलेक्टर एसपी को आदिवासियों द्वारा देव जातरा करने के लिए प्रशासन को कड़े निर्देश दिए।

यही वजह है कि तुएंगोंदी में बहुत शांति पूर्ण तरीके से देव जातरा कार्यक्रम संपन्न हुआ। जिसको लेकर राजा लाल निवेंद्र सिंह टेकाम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार जताया।

राजा लाल निवेंद्र सिंह टेकाम ने कहा कि आदिवासियों की पारम्परिक रीति रिवाज में देव जातरा कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण होता है। जहां आदिवासियों द्वारा आदिवासी रीति रिवाज के साथ अपने आराध्य देवी देवताओं की पारम्परिक रीति रिवाज से पूजा अर्चना करते हैं, देवों को बुलाते हैं और अपनी समस्याओं को बताकर समाधान पाते हैं।
ज्ञात हो कि विगत दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आदिवासी समाज के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में समाज के प्रतिनिधियों ने जामड़ी पाट में पारम्परिक देवता की अर्चना तथा वहाॅ स्थित जलकैना में अपनी पारंपरिक अनुष्ठान की अनुमति को लेकर लंबे समय से चली आ रही माँग रखी थी।
समाज की भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए, मुख्यमंत्री ने अविलंब जिला प्रशासन बालोद को आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय के आदेशों का पालन करते हुए बालोद जिला प्रशासन की देखरेख में आज जामड़ी पाट में अनुष्ठान का कार्य शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
जलकैना (कुंड) में आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार देव-आराधना की। इस दौरान समाज के लोगों में सकारात्मक उत्साह का भाव देखा गया, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की इस पहल की आदिवासी समाज ने सराहना भी की है।
यह निर्णय केवल एक अनुष्ठान की अनुमति तक सीमित नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की मूल सांस्कृतिक धरोहरों, परंपराओं और उनकी धार्मिक आस्थाओं के संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।




