बालोद में बंदरों का बढ़ता आतंक, वन विभाग की निष्क्रियता से दहशत में नागरिक
जूर्रीपारा, पुलिस लाइन और जेल कॉलोनी के लोग परेशान, एक आक्रामक बंदर ने तीन लोगों को किया घायल

बालोद :- नगर पालिका क्षेत्र के कई मोहल्लों में इन दिनों बंदरों का आतंक लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। जूर्रीपारा, पुलिस लाइन, जेल कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्रों में बंदरों के झुंड लगातार उत्पात मचा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि लोग अपने बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने में डर महसूस कर रहे हैं।

वहीं महिलाओं और बुजुर्गों में भी बंदरों के हमले का भय बना हुआ है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आक्रामक व्यवहार को लेकर कई बार वन विभाग को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। विभाग की उदासीनता के चलते समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है और लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
घरों और गलियों में मचा रहे उत्पात
क्षेत्रवासियों के अनुसार बंदरों के झुंड अचानक घरों की छतों, आंगनों और गलियों में पहुंच जाते हैं। वे घरों में रखे खाद्य पदार्थ और अन्य सामान उठा ले जाते हैं। कई बार राह चलते लोगों पर भी हमला कर देते हैं। इससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। बच्चों ने घरों के बाहर खेलना कम कर दिया है, जबकि महिलाएं भी अकेले निकलने से बच रही हैं।
एक बंदर ने तीन लोगों को किया घायल
हाल ही में एक आक्रामक बंदर ने अलग-अलग स्थानों पर तीन लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। इससे पहले भी बंदरों के हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान के अभाव में समस्या लगातार बनी हुई है।
शिकायतों के बाद भी नहीं पहुंची राहत
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में नहीं पहुंची। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाता तो आज लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
कभी भी हो सकती है बड़ी घटना
क्षेत्रवासियों ने आशंका जताई है कि बंदरों का व्यवहार लगातार आक्रामक होता जा रहा है। स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमले की संभावना बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
बढ़ती समस्या को देखते हुए नागरिकों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका और जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में विशेष टीम भेजकर बंदरों को पकड़ने की व्यवस्था की जाए तथा नियमित निगरानी रखी जाए ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच वन विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। नागरिकों का कहना है कि विभाग वन्यजीव संरक्षण के प्रति सजगता दिखाता है, लेकिन जब उन्हीं वन्यजीवों के कारण लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है तो अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जाती। बंदरों के बढ़ते आतंक ने विभाग की तैयारियों और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल जूर्रीपारा, पुलिस लाइन, जेल कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों के निवासी वन विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। वहीं लगातार बढ़ रही घटनाओं के कारण लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ती जा रही हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।




