*उमेश कुमार सेन जनसेवा और पारदर्शिता के लिए संघर्षरत आरटीआई कार्यकर्ता*
आरटीआई का जवाब देने से क्यों बच रहा शिक्षा विभाग?
स्काउट-गाइड जंबूरी मेले में करोड़ों के खर्च का मामला, 42 दिन बाद भी नहीं मिली जानकारी

बालोद :- जिले के ग्राम मालीघोरी में आयोजित स्काउट-गाइड जंबूरी मेले में हुए खर्च और व्यवस्थाओं की जानकारी को लेकर शिक्षा विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी पर नियमानुसार 30 दिनों के भीतर जवाब दिया जाना अनिवार्य है, लेकिन आवेदन की तिथि 30 जनवरी 2026 से लेकर आज 13 मार्च 2026 तक कुल 42 दिन बीत जाने के बाद भी आवेदक को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
जानकारी के लिए आवेदन बालोद निवासी सामाजिक कार्यकर्ता उमेश कुमार सेन द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी / जन सूचना अधिकारी, शिक्षा विभाग को दिया गया था। आवेदन में ग्राम मालीघोरी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्काउट-गाइड जंबूरी मेले से संबंधित विभिन्न वित्तीय एवं प्रशासनिक बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी गई थी।


किन-किन बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी
आरटीआई आवेदन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है—
ग्राम मालीघोरी में आयोजित स्काउट-गाइड जंबूरी के आयोजन की तिथि, स्वीकृत कुल बजट राशि तथा बजट स्वीकृति का स्रोत — शासन, प्रशासन एवं विभिन्न विभागों से प्राप्त निधि का विवरण।
आयोजन के लिए जारी की गई सभी निविदाओं की प्रतिलिपि, निविदा की तिथि, निविदा प्रकार, स्वीकृत दरें तथा कार्यादेश की प्रतियां।
निविदा के माध्यम से चयनित संस्थाएं, एजेंसियां, ठेकेदार एवं सेवा प्रदाताओं की नामावली तथा अनुबंध राशि और कार्य विवरण।
टेंट व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, परिवहन, आवास एवं अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित कार्यों का विस्तृत विवरण।
आयोजन में शामिल सभी विभागों द्वारा किए गए भुगतान का विभागवार विवरण, बिल, भुगतान रसीदें तथा लेखा अभिलेख।
आयोजन अवधि में किए गए स्थायी अथवा अस्थायी निर्माण कार्यों का विवरण, निर्माण एजेंसी का नाम, कार्य स्थल और स्वीकृत राशि।
आयोजन में भाग लेने वाले सभी स्काउट एवं गाइड दलों की जिला एवं राज्यवार सूची।
आयोजन से संबंधित समापन रिपोर्ट, मूल्यांकन रिपोर्ट, निरीक्षण टिप्पणियां तथा अनुशंसाएं।
आयोजन से संबंधित सभी विभागीय पत्राचार, आदेश पत्र, स्वीकृति नोटशीट एवं अनुमोदन दस्तावेज।
आरटीआई कानून क्या कहता है
जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7(1) के अनुसार किसी भी लोक सूचना अधिकारी को आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
यदि मांगी गई जानकारी संबंधित विभाग के पास उपलब्ध नहीं है, तो धारा 6(3) के तहत आवेदन को संबंधित विभाग को प्रेषित करना और आवेदक को इसकी सूचना देना आवश्यक होता है।
लेकिन इस मामले में 30 दिन की निर्धारित समय सीमा पार होने के बावजूद आज तक कोई जवाब नहीं दिया गया, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
करोड़ों के खर्च पर उठ रहे सवाल
ग्राम मालीघोरी में आयोजित यह जंबूरी मेला बड़े स्तर पर आयोजित किया गया था और इसमें विभिन्न विभागों से बड़ी राशि खर्च होने की चर्चा है। ऐसे में जानकारी न देना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है—
*उमेश कुमार सेन जनसेवा और पारदर्शिता के लिए संघर्षरत आरटीआई कार्यकर्त*
क्या विभाग के पास जानकारी उपलब्ध नहीं है? या फिर करोड़ों रुपये के खर्च से जुड़ी जानकारी को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है?
आवेदक ने जताई नाराजगी
आवेदक उमेश कुमार सेन का कहना है कि सूचना अधिकार कानून पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बनाया गया है, लेकिन जब जिम्मेदार विभाग ही समय सीमा के भीतर जवाब नहीं देते तो यह कानून की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती तो वे प्रथम अपील के माध्यम से आगे की वैधानिक कार्रवाई करेंगे।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
जिले में पहले भी कई मामलों में आरटीआई के जवाब समय पर नहीं देने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह मामला भी प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
*उमेश कुमार सेन जनसेवा और पारदर्शिता के लिए संघर्षरत आरटीआई कार्यकर्ता*
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में कब तक जानकारी उपलब्ध कराता है, या फिर यह मामला प्रथम अपील और उसके बाद सूचना आयोग तक पहुंचेगा।




