Tuesday, March 3, 2026

बालोद की नदियों पर माफियाओं का कब्जा: रोज 150 से ज्यादा ट्रकों में रेत की चोरी, विभाग का बहाना – स्टाफ और संसाधन नहीं…?

 

बालोद की नदियों पर माफियाओं का कब्जा: रोज 150 से ज्यादा ट्रकों में रेत की चोरी, विभाग का बहाना – स्टाफ और संसाधन नहीं…?

बालोद अंचल:- जिले की नदियों में इन दिनों अवैध रेत उत्खनन अपने चरम पर है। गुंडरदेही, गुरुर, बालोद और डौंडी विकासखंडों में खुलेआम तीन से चार चैन माउंटेन मशीनों से नदियों का सीना चीरकर रेत निकाली जा रही है। धमतरी, दल्लीराजहरा और गुंडरदेही मार्गों से प्रतिदिन 150 से अधिक हाइवा ट्रकों में रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है। स्थानीय मीडिया इस मुद्दे को लगातार उजागर कर रहे हैं। लेकिन न तो जिला प्रशासन जागा और न ही खनिज विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई की।

जब भी जिले के पत्रकार खनिज विभाग से सवाल करते हैं तो अधिकारी संसाधनों की कमी का बहाना बना देते हैं। सवाल यह उठता है कि यदि संसाधन नहीं हैं तो शासन स्तर पर मांग क्यों नहीं की जाती? जिले के RTO, यातायात, पुलिस और राजस्व विभाग का सहयोग क्यों नहीं लिया जा रहा? क्या यह सबकुछ माफियाओं को मिली मौन सहमति का संकेत है?

कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति

पिछले दो वर्षों में बालोद जिला अवैध रेत उत्खनन का गढ़ बन चुका है। विभाग कार्रवाई की औपचारिकता जरूर निभाता है, लेकिन असल में तस्करों पर कोई लगाम नहीं लग पाई है। अधिकारी द्वारा एक बार खानापूर्ति की कार्रवाई करने के बाद तस्कर सील तोड़कर पुनः रेत की चोरी करते हैं। बताया जाता है कि रोजाना 100 से 150 ट्रिप रेत की अवैध निकासी हो रही है।

चौंकाने वाली बात यह है कि कई बार विभाग का काम आम ग्रामीण कर रहे हैं। हाल ही में नेवारीकला के ग्रामीणों ने खुद ही अवैध उत्खनन में लगी गाड़ियों को पकड़ा और प्रशासन का ध्यान खींचा।

विभाग का बहाना और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश

जब भी ग्रामीण, पत्रकार या जनप्रतिनिधि अवैध गतिविधियों पर सवाल उठाते हैं, विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए जमीन को वन विभाग या दूसरे जिले का क्षेत्र बताने लगता है। मर्रामखेड़ा, सिंघनवाही, बेलौदा जैसी खदानों को वन क्षेत्र का हवाला दिया गया। जबकि पोंड क्षेत्र जहां पहले कार्रवाई होती रही। अब उसे कांकेर जिले का क्षेत्र बताया जा रहा है।

इस तरह के भ्रमित करने वाले जवाबों से पत्रकार भी असमंजस में पड़ जाते हैं लेकिन माफियाओं को अपना काम बेरोकटोक करने का रास्ता मिल जाता है। बताया जाता है कि इन माफियाओं के पीछे कथित तौर पर प्रदेश स्तर के प्रभावशाली नेता और मंत्रियों के करीबी लोग हैं। जो पहले कांग्रेस की सरकार में भी मंत्रियों के करीबी माने जाते रहे हैं। जिनके दबाव में विभाग चुप्पी साधे हुए है।

 खनिज संपदा भगवान भरोसे

बालोद जिले की खनिज संपदा आज पूरी तरह भगवान भरोसे है। पक्ष हो या विपक्ष सब एक ही नाव पर सवार नजर आ रहे हैं। यदि जल्द ही इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में नदियों का अस्तित्व और जिले की प्राकृतिक संपदा संकट में पड़ सकती है।

 

 

RELATED ARTICLES

Most Popular

- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
error: Content is protected !!