Friday, May 1, 2026

फिर एक बार उमेश कुमार सेन जनहित में* *समर्पित जन सेवक का*

*फिर एक बार उमेश कुमार सेन जनहित में* *समर्पित जन सेवक का*
*बड़ा खुलासा जन हित में*
*बालोद नगर पालिका में डिजिटल सिस्टम पर बड़ा सवाल: वर्षों से* *संचालन, पर अभिलेखों में आदेश “निरंक”*
बालोद
*नगर पालिका परिषद बालोद में कंप्यूटराइजेशन एवं डिजिटल लेखा-जोखा प्रणाली के संचालन को लेकर प्रशासनिक* *पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त आधिकारिक जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि इस प्रणाली को शुरू करने से संबंधित कोई प्रशासनिक आदेश या प्रस्ताव विभाग के* *अभिलेख में उपलब्ध नहीं है, जबकि जमीनी स्तर पर वर्षों से कंप्यूटर प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।*
*RTI से खुलासा: “कोई आदेश उपलब्ध नहीं”*
*जनहित में सक्रिय* *नागरिक उमेश कुमार सेन द्वारा 02 अप्रैल 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत* *आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन में नगर* *पालिका में:*
*कंप्यूटर प्रणाली की शुरुआत का वर्ष*
*डिजिटल लेखा-जोखा के* *संचालन का आधार*
*संबंधित प्रशासनिक* *आदेश/प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति*
*की जानकारी मांगी गई थी।*
*इस पर जन सूचना अधिकारी द्वारा 30 अप्रैल 2026 को लिखित उत्तर दिया गया कि:*
*“कंप्यूटर सुविधा एवं डिजिटल लेखा-जोखा प्रणाली की शुरुआत हेतु कोई प्रशासनिक आदेश/प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।”*
*व्यवहार में सिस्टम चालू, अभिलेखों में शून्य*
*स्थानीय स्तर पर नगर पालिका के कार्यों में कंप्यूटर आधारित प्रक्रिया का उपयोग लंबे समय से* *किया जा रहा है। टैक्स रिकॉर्ड, लेखा-जोखा, कार्यालयीन कार्य—सभी में डिजिटल माध्यम अपनाए जाने के संकेत मिलते हैं।*
*ऐसी स्थिति में यह विरोधाभास सामने आता है कि:*
*व्यवस्था चालू है,*
*पर उसका कोई वैधानिक आधार रिकॉर्ड में नहीं है।*
*कानूनी स्थिति: नियम क्या कहते हैं*
*सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत:*
*धारा 2(f): सूचना में सभी प्रकार के रिकॉर्ड, आदेश और दस्तावेज शामिल होते हैं*
*धारा 4(1)(a): प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण* *को अपने अभिलेखों का* *सुव्यवस्थित संधारण करना अनिवार्य है*
*धारा 7(1): मांगी गई* *सूचना समय-सीमा में पूर्ण एवं सही रूप में देना अनिवार्य है*
*यदि वास्तव में कोई* *आदेश मौजूद नहीं है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया और वित्तीय अनुशासन पर प्रश्न उठाता है।*
*यदि आदेश होते हुए भी* *प्रस्तुत नहीं किया गया, तो यह पारदर्शिता के* *सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है।*
*गंभीर प्रशासनिक प्रश्न*
*इस पूरे प्रकरण में कई अहम सवाल उभरते हैं:*
*बिना लिखित स्वीकृति के कोई भी प्रणाली वर्षों तक कैसे संचालित हो सकती है?*
*क्या यह कार्य केवल मौखिक निर्देशों के आधार पर किया गया?*
*कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और डिजिटल रखरखाव पर खर्च किस आधार पर स्वीकृत हुआ?*
*क्या अभिलेखों का संधारण सही तरीके से नहीं किया गया, या* *जानकारी छिपाई जा रही है?*
*जवाबदेही तय होने की मांग*
*जनहित में यह आवश्यक हो जाता है कि:*
इस पूरे मामले की स्वतंत्र *जांच कराई जाए*
*कंप्यूटर प्रणाली के* *संचालन का वैधानिक* *आधार स्पष्ट किया जाए*
*यदि प्रक्रिया में कोई त्रुटि या अनियमितता पाई* *जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की* *जिम्मेदारी तय की जाए*
*जनहित में निरंतर पहल:* *एक नागरिक की सक्रिय भूमिका*
*इस पूरे प्रकरण में यह भी* *उल्लेखनीय है कि उमेश कुमार सेन द्वारा जनहित से जुड़े मुद्दों को लगातार सामने लाने का कार्य किया जा रहा है।*
*सूचना के अधिकार के माध्यम से तथ्य एकत्रित कर जनहित के विषयों को सार्वजनिक करना*
*प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु निरंतर प्रयास*
*शासकीय कार्यप्रणाली में संभावित विसंगतियों को उजागर कर सुधार की दिशा में पहल*
*स्थानीय स्तर पर विभिन्न मुद्दों को सामने लाकर जन-जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय योगदान*
*नागरिक अधिकारों एवं सुशासन के प्रति सतत प्रतिबद्धता*
*स्थानीय नागरिकों का मानना है कि ऐसे प्रयासों से न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता आती है,* बल्कि *प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही भी मजबूत होती है*।

Previous article
Next article
RELATED ARTICLES

Most Popular

- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
error: Content is protected !!