Monday, March 2, 2026

*उमेश कुमार सेन ने बताया दिसंबर माह क्यों है खास:-  गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों का अमर बलिदान*

 

*उमेश कुमार सेन ने बताया दिसंबर माह क्यों है खास:-  गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों का अमर बलिदान*

बालोद :- *इतिहास, धर्म और वीरता की मिसाल है*
दिसंबर माह भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह महीना केवल सर्दी का प्रतीक नहीं, बल्कि धर्म, बलिदान और शौर्य की अमर गाथाओं को भी संजोए हुए है। सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के चारों पुत्रों—जिन्हें साहिबजादे कहा जाता है—का बलिदान इसी माह हुआ था।
इस विषय पर जानकारी देते हुए पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक एवं विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री उमेश कुमार सेन ने बताया कि दिसंबर का महीना हमें अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और धर्म की रक्षा के लिए अपने सर्वस्व को अर्पित करने की प्रेरणा देता है।
गुरु गोविंद सिंह जी और उनके चार साहिबजादे
उमेश कुमार सेन ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी के चार पुत्र थे—
साहिबजादा अजीत सिंह (18 वर्ष)
साहिबजादा जुझार सिंह (14 वर्ष)
साहिबजादा जोरावर सिंह (9 वर्ष)
साहिबजादा फतेह सिंह (7 वर्ष)
1705 ईस्वी में मुगल शासक औरंगजेब की सेना द्वारा आनंदपुर साहिब पर आक्रमण किया गया। इस दौरान गुरु गोविंद सिंह जी का परिवार बिछुड़ गया।
बड़े साहिबजादों का वीरगति
उमेश कुमार सेन ने बताया कि साहिबजादा अजीत सिंह और साहिबजादा जुझार सिंह ने चमोkaur साहिब के युद्ध में अत्यंत वीरता के साथ मुगल सेना का सामना किया। अल्पायु होने के बावजूद उन्होंने धर्म और न्याय की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका बलिदान इतिहास में अद्वितीय माना जाता है।
छोटे साहिबजादों का अमर बलिदान
वहीं गुरु गोविंद सिंह जी की माता माता गुजरी जी के साथ छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सिरहिंद में बंदी बना लिया गया। उन्हें इस्लाम स्वीकार करने का दबाव डाला गया, लेकिन दोनों बालकों ने धर्म परिवर्तन से इंकार कर दिया।
इसके परिणामस्वरूप निर्दोष बाल साहिबजादों को जीवित दीवार में चुनवा दिया गया। इस हृदयविदारक घटना के बाद माता गुजरी जी ने भी प्राण त्याग दिए।
आज भी प्रेरणा है साहिबजादों का इतिहास
उमेश कुमार सेन ने कहा कि यह इतिहास केवल सिख समाज का नहीं, बल्कि पूरे भारत और सनातन संस्कृति की धरोहर है। साहिबजादों का बलिदान हमें सिखाता है कि सत्य, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे दिसंबर माह में साहिबजादों के बलिदान को याद करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं।
निष्कर्ष
दिसंबर माह इसलिए खास है क्योंकि यह हमें त्याग, साहस और धर्मनिष्ठा की याद दिलाता है। गुरु गोविंद सिंह जी और उनके चारों साहिबजादों का इतिहास आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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