अफवाह खबरों की जमीनी हकीकत
गुरेदा में पेयजल के लिए उपयोग किए जा रहे बोर में आ रहा साफ पानी
फ्लोराइड युक्त पानी का नहीं कर रहे पेजयल के लिए उपयोग

बालोद :- बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से एक अफवाह फैल रही है कि गुण्डरदेही ब्लॉक के गुरेदा गांव में फ्लोराइड युक्त पानी पीने से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
जिसकी जानकारी मिलते ही पीएचई विभाग की टीम गुरेदा गांव पहुंचकर जांच की। जांच में स्पष्ट हुआ कि गुरेदा गांव का कोई भी व्यक्ति फिलहाल फ्लोराइड पानी पीने से बीमार या उनमें दुष्प्रभाव नहीं है।
सरपंच ने विभाग को सौंपा प्रतिवेदन
गुरेदा गांव के सरपंच महेंद्र साहू ने पीएचई विभाग को लिखित व हस्ताक्षर युक्त प्रतिवेदन सौंपते हुए कहा कि गुरेदा गांव में पानी के लिए 9 स्रोत हैं। जिसमें 6 स्त्रोत में फ्लोराइड की मात्रा मानक से कम है जो पीने योग्य है जिसे ग्रामवासियों द्वारा पेयजल के लिए उपयोग किया जा रहा है।
विभाग की बिना अनुमति के निस्तारी के लिए उपयोग
सरपंच ने प्रतिवेदन के माध्यम से बताया कि गांव में एक अन्य स्त्रोत जिसमें फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक है उसे पीएचई विभाग की ओर से लाल पेंट कर केपिंग कर दिया गया था।
लेकिन नदी सुख जाने की वजह से ग्रामीणों द्वारा पीएचई विभाग की बगैर अनुमति के निस्तारी के लिए ग्रामीण उपयोग कर रहे थे। जिस पर पीएचई विभाग ने फिर से कैपिंक कर लाल पेंट किया गया और उस पानी को उपयोग ना करने की समझाइश दी गई।
पिछले कुछ सालों से फ्लोराइड के एक भी केस नहीं
सरपंच ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि ग्राम गुरेदा में फ्लोराइड के विषय में डॉक्टर वर्मा से चर्चा की जिस पर डॉक्टर ने बताया कि पिछले कुछ सालों से गुरेदा में फ्लोराइड के एक भी केस सामने नहीं आए और ना ही किसी व्यक्ति पर फ्लोराइड का दुष्प्रभाव हुआ है। सरपंच ने बताया कि दो दिन पहले गुरेदा गांव में पानी को लेकर गुंडी में महिलाओं द्वारा पानी ले जाते फोटो वायरल हो रही थी जो गुरेदा गांव की नहीं है बल्कि महाराष्ट्र की है।
गुटका खाने और दांतों की सफाई नहीं करने से समस्या
जिला अस्पताल के दंत चिकित्सक डॉ नीलम डहरिया के पास जब गुरेदा निवासी 14 वर्षीय लोकेश्वर कुंभकार को जांच के लिए ले जाया गया तो जब डॉ नीलम ने लोकेश्वर से पूछा तो बताया कि वह तीन साल से गुटका खा रहा है। डॉक्टर ने जब लोकेश्वर के दांत की जांच की तो देख कि उनके दांतों में गुटके के दाग लगे हुए हैं और दांतों की परस्पर सफाई नहीं होने से उनके दांत में परत जमी हुई है।
डॉक्टर की जांच में यह भी पता चला कि लोकेश्वर के दांत में फ्लोरोसीस की थोड़ी समस्या नहीं है। बल्कि गुटके खाने और परस्पर सफाई नहीं करने से उनके दांतों में समस्या है। डॉक्टर ने उन्हें दांतों की परस्पर सफाई करने, ब्रश करने और गुटका ना खाने की सलाह दी है।
सागर वर्मा, कार्यपालन अभियंता पीएचई
गुरेदा गांव में फ्लोराइड का दुष्प्रभाव कुछ सालों से लोगों में नहीं है।
महिलाओं द्वारा बर्तन में पानी भरकर ले जाते हुए फोटो महाराष्ट्र के नासिक जिले का है जिसे गुरेदा गांव का बताकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। एक बोर जिसमें फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक थी उसमें विभाग द्वारा पहले ही कैंपिंग कर उनमें लाल पेंट कर दिया था।
लेकिन ग्रामीणों द्वारा विभाग को बिना जानकारी दिए उसका पानी निस्तारी के लिए उपयोग कर रहे थे जिसे फिर से केपिंग कर पेंट कर दिया गया है। वर्तमान में वहां पीने के पानी के लिए 6 स्रोत मौजूद हैं।




