रेत माफियाओं पर प्रशासन और खनिज विभाग बड़े मेहरबान “” कार्यवाही के नाम पर सिर्फ लीपापोती””
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आखिर किस का है इतना दबाव जिस पर बेख़ौफ़ है रेत माफिया

बालोद : -रेत माफियाओं को प्रशासन और खनिज विभाग ने खुली छूट दे रखी है। यही वजह है कि गुरुर विकासखंड के सबसे अंतिम क्षेत्र में स्थित ग्राम पोड़ और चंदन बि रही में इन दिनों रेत माफियाओं का राज चल रहा है। रेत माफिया बिना रॉयल्टी के रेत बेचकर शासन को राजस्व का चूना लगा रहे हैं।

खनिज उड़नदस्ता के द्वारा परिवहन में लगे वाहनों को जब्त कर कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जाती है।जबकि रेत घाट में उत्खनन में लगे वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
बालोद जिले में रेत माफियाओं के हौसले इस तरह बुलंद है कि रेत खदान के विधिवत टेंडर के बाद भी नही हुआ है जिस पोड़ और चदनबिरही रेत खदान से उत्खनन नहीं होना है वहां पर भी धड़ल्ले से नदी से रेत निकाला जा रहा है।
बता दें कि रेत माफिया रात को 10 बजते ही रेत लोडिंग के लिए रेत घाट पर जाते है और पोड़ और चदनबिरही रेत खदान से रेत लोडिंग कर सुबह 4 बजे तक रेत का अवैध रूप से परिवहन करते है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक रेत माफिया एक साथ 2 से 3 ट्रैक्टर व ट्रॉली लेकर रेत घाट जाते है और रात भर में दर्जनों ट्रिप रेत का अवैध परिवहन करते है।
चंदनबिरही में खुले आम अवैध रेत उत्खनन से प्रशासनिक अमले पर उठ रहे सवाल
जिले में रेत खदानों से रेत खनन के निविदा प्रक्रिया अवरुद्ध होने की वजह से आधिकारिक तौर पर कहीं भी रेत खदान संचालित किया जाना अवैध है , ऐसे में चंदन बिरही में खुले आम अवैध रेत उत्खनन से प्रशासन के कर्तव्यनिष्ठा पर लोग सवाल उठाने लगे हैं ।
जानकारी के अनुसार ग्रामीण अंचल में खुले आम बड़ी मात्रा में रेत उत्खनन का अवैध कार्य जोरों से चल रहा है , और इसपर किसी प्रकार की कार्रवाई न होती देख अब क्षेत्रवासी दबी जुबान में चर्चा करने लगे हैं कि ये अवैध खनन खनिज विभाग के संरक्षण या किसी जिले के नेता के संरक्षण में ही संचालित हो रहा है , अन्यथा ये संभव नहीं की इतनी बड़ी मात्रा में रेत खनन का कार्य संचालित हो और प्रशासन को इसकी भनक भी न लगे ।
शासन को रोज लग रहा लाखों का चुना
रेत माफियाओं द्वारा बिना अनुमति के रेत का अवैध उत्खनन एवं – परिवहन कर वारे न्यारे किया जा रहा है। इससे विभाग के अलावा शासन को प्रतिदिन लाखों का चूना लग रहा है। इस दिशा में ना तो – शासन प्रशासन गंभीर है, और ना ही विभाग के अधिकारी कर्मचारी।




