दो गांव के लाल प्रभावित किसानों ने दो दिनों तक किया चक्काजाम
लोहारा नपं अध्यक्ष लाल निवेन्द्र सिंह टेकाम की मौजूदगी में हुई मध्यस्थता, रोजगार देने पर बनी सहमति

बालोद :- बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक अंतर्गत माइंस इलाके में आने वाले कुमुडकट्टा, कोपेडेरा गांव के किसानों ने लाल पानी की समस्या को लेकर चक्काजाम किया।

अनिश्चित कालीन चक्काजाम करने की रणनीति के बीच डौण्डी लोहारा नगर पंचायत अध्यक्ष लाल निवेन्द्र सिंह टेकाम की मध्यस्थता के बाद प्रदर्शन को दो दिन में ही स्थगित कर दिया गया।
दरअसल कुमुड़कट्टा और कोपेडेरा गांव के पास में ही कच्चे लोहे का भंडार है। जिसके चलते भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर से आसपास में तीन माइंस लीज पर दी गई है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से निकलने वाला कच्चा लोहा जब गाड़ियों के माध्यम से फैक्ट्रीयों तक पहुंचाया जाता है तो वही कच्चा लोहा कुमुड़कट्टा और कोपेडेरा गांव के किसानों के खेतों में जाता है। जिसके चलते किसानों की फसलें प्रभावित हो रही है।
मृदा परिक्षण रिपोर्ट में मिट्टी उपजाऊ

किसानों की ओर से चक्काजाम किये जाने के पहले स्थानीय प्रशासन के माध्यम से खेतों के मिट्टी की जांच कराई गई थी। लेकिन मिट्टी की जांच किये जाने पर वह सहीं पाई गई। कच्चे लोहे से मिट्टी को किसी तरह का नुकसान नहीं होना पाया गया। रिपोर्ट के आने से किसान नाखुश है। किसानों का आरोप है कि रिपोर्ट जानबूझकर गलत बनाया गया है।
जबकि उनके खेतों की मिट्टी कच्चे लोहे और माइंस से निकलने वाले लाल पानी के चलते बर्बाद हो रही है।
बीएसपी अधिकारी, सीएसपी और नपं अध्यक्ष से बैठक
15 सितंबर से 16 अक्टूबर तक जारी चक्काजाम के चलते माइंस से आने वाली गाड़ियों की लंबी कतार लग गई। जिसके बाद डौण्डी लोहारा नगर पंचायत अध्यक्ष लाल निवेन्द्र सिंह टेकाम, बीएसपी के डिप्टी जनरल मैनेजर प्रवीण राय सहित अन्य अधिकारी, राजहरा सीएसपी चित्रा वर्मा की मौजूदगी में किसानों से बैठक की गई। जहां उन्हें अधिकारियों ने रिपोर्ट की जानकारी दी। बीएसपी के अधिकारियों ने दोबारा मिट्टी परिक्षण कराने की सलाह किसानों को दी और गांव के कुछ लोगों को रोजगार दिलाने की बात पर किसानों ने चक्काजाम स्थगित किया।
रिपोर्ट पाॅजेटिव आने पर फिर होगा प्रदर्शन
किसानों का कहना है कि मिट्टी परिक्षण के दौरान रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ किया गया है। चूंकि लाल पानी प्रभावित होने की पुष्टि का कोई आधार किसानों के पास नहीं है जिसके चलते नये सिरे से मिट्टी की जांच करवाने का निर्णय किसानों ने लिया। इस दौरान अगर मिट्टी लाल पानी और कच्चे लोहे से प्रभावित पाई जाती है तो किसानों ने एक बार फिर प्रदर्शन करने की बात कही।




