जिला मुख्यचिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी जे.एल.उइके के निर्देशानुसार एवं खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील भारती के मार्गदर्शन में नेत्रदान का महान संकल्प हुआ पूरा

बालोद (गुरूर ) :- बालोद जिले में मानवता और परोपकार का एक उल्लेखनीय उदाहरण उस समय सामने आया जब स्वर्गीय श्रीमती बसंती बाई, पति छबील साहू (निवासी –दुपचेरा, गुरूर ), द्वारा जीवनकाल में भरा गया मरणोपरांत नेत्रदान घोषणा पत्र उनके परिवारजनों ने संकल्पपूर्वक पूरा किया।

स्वर्गीय बसंती बाई के निधन के बाद उनके परिजनों ने बिना किसी विलंब के जिला नेत्रदान अधिकारी को जानकारी प्रदान की, ताकि उनका पवित्र संकल्प समय पर पूरा किया जा सके। परिवार की इस संवेदनशील पहल के बाद शाम 6:00 बजे जिला नेत्र टीम द्वारा नेत्र एकत्रित किए गए और सुरक्षित रूप से AIIMS रायपुर नेत्र बैंक प्रेषित किए गए।
आश्रम एवं सामाजिक संगठनों का सहयोग सराहनीय
नेत्रदान की जानकारी उपलब्ध कराने में कबीर आश्रम के साहेबजी श्री देवेंद्र साहेब का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने परिवार को समय पर मार्गदर्शन देकर पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न करवाने में अहम भूमिका निभाई।
साथ ही दुपचेरा आश्रम के संत साहेब एवं आश्रम सदस्यों का सहयोग भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, जिन्होंने परिवार को मानसिक रूप से सशक्त किया और नेत्रदान की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग दिया।
नेत्र एकत्रण में सम्मिलित समर्पित टीम
मरणोपरांत नेत्रदान की यह प्रक्रिया जिला स्वास्थ्य विभाग के कुशल एवं प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा पूरी की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल रहे—अनिल कुमार सिन्हा, ANO, बालोद, डॉ. ठाकुर, MO, गुरूर,नेत्र सहायक अधिकारी गण, डिगेश देवदास, OAO, श्यामसुंदर देवांगन, OAO,कुशल साहू, OAO, इन सभी सदस्यों ने संवेदनशील परिस्थिति में पूरी निष्ठा, समयबद्धता और तकनीकी दक्षता के साथ कार्य कर नेत्रों को सुरक्षित रूप से संरक्षित किया।
निदेशन एवं पर्यवेक्षण में उक्त कार्यक्रम जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO)डॉ जे. एल.उइके ,एवं खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील भारती गुरुर के निर्देशन में संपन्न कराई गई।
नेत्रदान — अमर मानवता का प्रतीक है, स्वर्गीय बसंती बाई द्वारा किया गया यह पुण्य कार्य दो व्यक्तियों को नई रोशनी प्रदान करेगा। जिला स्वास्थ्य विभाग उनके परिवारजनों, आश्रम प्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं एवं नेत्र टीम के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता है।
यह कार्यक्रम समाज को प्रेरित करती है कि नेत्रदान एक ऐसा अमर दान है जो मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में प्रकाश बनकर लौटता है।




